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जब भी अकेला बैठता हु

जब भी अकेला बैठता हु  तो एक अजीब सी गंध जो फूलो की नही नहीं किसी इत्र की होती है  उसका अहसास मुझे होता है...

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मौलाना रूम कहते हैं

मौलाना रूम कहते हैं आं बादशाहे-आलम दर बस्ता बूद महकम…….पोशीद दलक-आदम यअमी कि बर दर आमद!!! अनुवाद – “शहंशाहों के शहंशाह ने शरीर के...

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मा पिता का घर

बेटे बेटी के लिए मा पिता का घर शिष्य के लिए गुरु का दर ये दोनों ऐसी जगह है जहाँ अवगुणों को दूर कर ...

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हा मैं पिता हु

हा मैं पिता हु तो जीता हु ओर जीने के लिए मैं पिता हु पर क्या पिता हु ये बताना जरूरी है जी मैं ...

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