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हृदय में ईश्वर

जिन्होंने अपने आंतरिक अस्तित्व पर परिश्रम किया, अपनी आंतरिक व्ययवस्था को पवित्र किया, आत्मा को जाग्रत किया और आध्यात्मिकता की सहायता से ईश्वर को...

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याद

जब भी उसको याद करता हु तो यही चाहत होती है तेरी नजर मुझ पर बनी रहे और तेरी नजरे  इनायत यू ही प्रेम...

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भक्ति की सबसे उत्तम अवस्था

सख्य: ईश्वर को ही अपना परम मित्र समझकर अपना सर्वस्व उसे समर्पण कर देना तथा सच्चे भाव से अपने पाप पुण्य का निवेदन करना।...

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समर्थ सदगुरू महात्मा श्री रामचन्द्र जी महाराज

परा  –वाणी लेखक   समर्थ सदगुरू महात्मा श्री रामचन्द्र जी महाराज                               ( श्री लालाजी महाराज  ) (समर्थ  सद्गुरु महात्मा  श्री  रामचंद्र  जी महाराज द्वारा  उर्दु ...

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राम सन्देश – जिज्ञासा 

राम सन्देश – फरवरी,  1973.                                                   जिज्ञासा     एक प्रेमी भाई के ह्रदय में यह बात घिर आई है कि अब तो श्री गुरुदेव परमसन्त...

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