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तु ही तू 

जिसने इस जहां को भुला के अपने को उस मुकाम में ढाल लिया जहाँ न धूप न छाव न कुछ  बस अगर कुछ है ...

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योग्य गुरु 

जब किसी योग्य गुरु  के सानिध्य में रह कर गुरु की मेहर से शिष्य में नाद उतपन्न हो वो नाद-लय’ में डूबा हुआ रहता...

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राम सन्देश

राम सन्देश : जनवरी-फ़रवरी, 2012.                                       ...

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उदास मन

कल उदास मन था फिर भी चारो ओर रोशनी के माहौल ने मुझे चेता दिया की बाहर के उजाले के उजाले से मन के...

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गुरु की याद

आपने सच ओर अकाट्य सच लिखा है पर कभी कभी जब अपनो की या गुरु की याद आती है और हम अपने इस छोटे...

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