October 20, 2025 गुरु और शिष्य का एकत्व: हृदय से हृदय, आत्मा से आत्मा का मिलन Pitaji ne बहुत गहरी और सुंदर बात कहि है — इसमें साधक और गुरु के अद्वैत संबंध का सार निहित है। जब ध्यान की... Read More
October 17, 2025 जब भीतर की आँख खुलती है: गुरु-दर्शन का सच्चा रहस्य गुरुदेव कह रहे हैं कि— “मुझे वही देख सकता है जो अंधा हो; वही सुन सकता है जो बहरा हो; और वह ही समझ... Read More
October 15, 2025 जब शून्य भी मिट जाए: आत्मा की अंतिम यात्रा ब्रह्म में विलय की ओर जब कोई साधक समाधि की अवस्था मे शुण्य को प्राप्त कर लेता है ये गुरु के द्वारा दृष्टिपात के बिना व सहयोग के बोना... Read More
October 14, 2025 सहस्त्रार चक्र में ओम: आत्मा और ब्रह्म के मिलन का नाद सहस्त्रार चक्र में ‘ओम’ का अनुभव एक अत्यंत दिव्य और सूक्ष्म प्रक्रिया है, जो साधक की साधना, ध्यान और आत्मिक शुद्धता के उच्चतम स्तर... Read More
October 10, 2025 आत्म-संयम, आराधना और गुरु-कृपा: आत्म-जागरण की त्रिवेणी ।आत्म-संयम, आध्यात्मिक आराधना और गुरु-कृपा — ये तीनों मिलकर आत्म-जागरण और मोक्ष की दिशा का निर्माण करते हैं।आत्म-संयमआत्म-संयम का अर्थ है—इंद्रियों, मन और इच्छाओं... Read More
October 9, 2025 अहंकार का टूटना और हृदय का मधुर पिघलना “मैं की मटकी क्या फूटी, हृदय मक्खन हो गया” एक आध्यात्मिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें मटकी फूटने का अर्थ है अहंकार (मैं या... Read More