January 15, 2026 जहाँ गुरु व्यक्ति नहीं रहता गुरु का देह रूप तो सबको दिखता है — वही सामान्य दृष्टि है।पर गुरु के हृदय में कौन विराजमान है, यह केवल वही जान... Read More
January 15, 2026 मन मांगता है, कर्म तय करता है, परमात्मा घटाता है कर्म के अनुसार जन्म और कर्म करने को स्वतंत्र फिर भी हमारी इचछाये असीमित है हम परमात्मा से मांगते है और हमारी भावनाएं ब्रह्मण्ड... Read More
January 15, 2026 जब ज्ञान भक्ति में डूब जाता है ईश्वर से मिलाने वाली साधना एक ही है — भक्ति,और भक्ति का प्राण है दिल से किया गया समर्पणयुक्त इल्म (ज्ञान)।यहाँ इल्म केवल पढ़ा-सुना... Read More
January 15, 2026 जहाँ नाद बोलता है, वहाँ साधक मिट जाता है अगर कोई साधक एक मत हो कर नाद को लगातार महसूस कर निर्लिप्त समाधि में लय हो जाये तो उसे वो मुकाम हकसिल हो... Read More
January 13, 2026 जहाँ देने वाला भी मिट गया, पाने वाला भी नहीं रहा यह भाव ही सबसे बड़ी पेशकश है।यह पंक्ति समर्पण की पराकाष्ठा कहती हैआज पूज्य दादा ठाकुर राम सिंह जी की पुण्य तिथि है उनके... Read More
January 12, 2026 निराकार और साकार: एक ही चेतना के दो आयाम परमात्मा — निराकार भी है और साकार भी।उसी तरह गुरु और शिष्य भी केवल देह नहीं हैं, न ही केवल विचार —वे चेतना के... Read More