February 19, 2026 अध्यात्म में गुरु को अक्सर तबीब (वैद्य) या हकीम कहा गया है — क्योंकि वह शरीर नहीं, मन–चेतना–अहंकार के रोगों का उपचार करता है।... Read More
February 18, 2026 क्या नफ़्स (मन) समाप्त हो जाता है या पारदर्शी बन जाता है? सूफ़ी दृष्टि सूफ़ी मार्ग में लक्ष्य है फ़ना और बक़ा। फ़ना =... Read More
February 17, 2026 भाई विचारों का flow सक्रिय होना बहुत शुभ संकेत है — पर अब यहाँ सूक्ष्म विवेक चाहिए, वरना मन बहुत महीन जाल बुन देता... Read More
February 17, 2026 भाई साहब राकेश जी आपने बहुत सूक्ष्म और गूढ़ बात कही है—यह समझ से नहीं, देखने से पकड़ी जाती है। आप जिस “समय” की... Read More
February 16, 2026 जीवन्मुक्त की अवस्था: देह से परे शुद्ध साक्षी जीवन्मुक्त की अवस्था (जीते-जी मुक्ति) जीवन्मुक्त वह है जो शरीर रहते हुए भी अपने को शरीर-मन से अलग, शुद्ध साक्षी-चैतन्य के रूप में जान... Read More
February 3, 2026 कामिल मुर्शिद की पहचान: दावा नहीं, हाल की गवाही प्रश्न बहुत संवेदनशील और गहन है—क्योंकि सूफ़ी परंपरा में पूर्ण गुरु (कामिल मुर्शिद) का मूल्यांकन दावे से नहीं, हाल से होता है। आप पिताजी... Read More