April 21, 2025 दोहा:“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय।बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय॥” शाब्दिक अर्थ:अगर गुरु और ईश्वर दोनों एक साथ सामने हों, तो पहले... Read More
April 21, 2025 मेरे पतिं एक अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी हैं, जो आध्यात्मिकता, सेवा और ज्ञान के अद्वितीय संगम को दर्शाते हैं। सोहम ध्यान योग केंद्र के... Read More
April 19, 2025 के विकारों पर नियंत्रण और मन को स्थिर करने के उपायों पर सोच-विचार करना आत्मिक उन्नति की दिशा में पहला कदम है। चलिए इसे... Read More
April 18, 2025 गंगा, यमुना और सरस्वती का प्रतीकात्मक अर्थ: गंगा, यमुना और सरस्वती केवल भौतिक नदियाँ नहीं हैं, ये मानव शरीर और योगिक चेतना में बहने... Read More
April 18, 2025 शिष्य यदि अज्ञानी हो — तो भी वह सच्चे हृदय से सद्गुरु की तलाश कर सकता है। ज्ञान की शुरुआत ही जिज्ञासा और विनम्रता... Read More
April 18, 2025 जब कोई महात्मा या सद्गुरु अपनी दिव्य शक्ति के द्वारा शिष्य के शरीर, मन और आत्मा के हर कण में अपनी ऊर्जा का संचार करता है, तो शिष्य एक अनहद (असीम और अवर्णनीय) अनुभव में प्रवेश करता है। यह अनुभव सामान्य इंद्रियों की सीमा से परे होता है। यदि शिष्य इस अवस्था को पहचान कर पूर्ण समर्पण भाव से अपने गुरु के चरणों में अर्पित हो जाए, तो वह पूर्णता (आत्मिक सिद्धि या मोक्ष) की ओर अग्रसर हो जाता है। इस मार्ग में आगे बढ़ने के लिए शिष्य में सत्यनिष्ठा (सत्य के प्रति दृढ़ता), समर्पण, समभाव (सबके प्रति समान दृष्टि) और सम्यकता (सही दृष्टिकोण... Read More