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प्राचीन गुरु परम्परा भारतीय अध्यात्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह परम्परा गुरु-शिष्य संबंध पर आधारित है, जहाँ ज्ञान और आध्यात्मिक अनुभूति का...

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स्वार्थ रहित होना और निष्काम कर्म करना व्यक्ति के आंतरिक विकास और समाज के कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जब हम बिना किसी...

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निष्काम कर्म का मतलब है बिना किसी फल की इच्छा के अपने कर्तव्यों को निभाना। इसे अपने जीवन में अपनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण...

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स्वार्थ रहित होना और निष्काम कर्म करना व्यक्ति के आंतरिक विकास और समाज के कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जब हम बिना किसी...

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बहुत से योग सोचते है कि मैं क्या लिख रहा हु ओर क्यो क्योकि जो मजा जीने में वही आनंद मरने के बाद भी...

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अपने आराध्य को हर वक़्त ध्यान कर मनन करना ही सेवा है इसमें माता पिता और गुरु किसी भी की हम सेवा करते है तो हमारे बुरे कर्म कटते है और अच्छे कर्म पनपते है पूजा ध्यान भक्ति समाधि किसी भी एक को अपना कर हम जीवन सुधार सकते है और गुरु के माध्यम से केवल्य स्तिथि पा सकते है उसके लिए गुरु का पूर्ण होना जरूरी है

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