पिताजी साहब का गुरु पद प्राप्त होने के बाद वो अपने शिष्यों को तवज्जुह या दीक्षा क्लब जाकिर यानी हृदय के समीप आत्मा के...
यह सत्य है कि जब कोई व्यक्ति कार्यों में व्यस्त होता है, तो उसका ध्यान पूरी तरह अपने इष्ट या अनाहद नाद पर स्थिर...
यह सत्य है कि जब कोई व्यक्ति कार्यों में व्यस्त होता है, तो उसका ध्यान पूरी तरह अपने इष्ट या अनाहद नाद पर स्थिर...
पिताजी साहब जब गुरु भगवान राधामोहन लाल जी के शिष्य बन उसी दिन उन्होंने अपनी पूर्ण कृपा पिताजी की आत्मा के साथ ले कर...
हमारी आत्मा को सोते-जागते अनाहद (नाद, शुद्ध चेतना, ईश्वर के साथ निरंतर जुड़ाव) पर बनाए रखने के लिए नियमित साधना और जीवनशैली में बदलाव...
आध्यात्मिक जीवन का अर्थ व्यक्ति की आस्था, अनुभव, और चेतना के स्तर पर निर्भर करता है। यह केवल केवल्य (मोक्ष या आत्मबोध) प्राप्त करने...
आत्मा का परमात्मा में विलय (जिसे मोक्ष, कैवल्य, निर्वाण या आत्मसाक्षात्कार भी कहा जाता है) आध्यात्मिकता और भारतीय दर्शन में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।...
इस संसार में अधिकतर कार्य स्वार्थ से प्रेरित होते हैं, क्योंकि व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं और सुख-सुविधाओं को पहले रखता है। लेकिन इसका अर्थ...
गुरु और परमात्मा में अंतर गुरु और परमात्मा दोनों ही आध्यात्मिक मार्गदर्शन और आत्मज्ञान से जुड़े हैं, लेकिन उनके स्वरूप और भूमिकाओं में महत्वपूर्ण...
देवता और ईश्वर में क्या भेद है? धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से, ईश्वर और देवता के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। हालांकि, सामान्य रूप...