सियत होती है सबकी अपनी अपनी कोई बड़ा और कोई छोटा हो सकता है जैसे सूर्य के आगे दीपक कोई अहमियत नही रखता पर...
तरागी बनना बहुत कठिन है राह उस पनघट की जहां गम न खुशी ही बस तू ही तू हो
जिसने इस जहां को भुला के अपने को उस मुकाम में ढाल लिया जहाँ न धूप न छाव न कुछ बस अगर कुछ है ...
कोशिश तो बहुत की है मैंने खामोश रहने की पर न जाने क्यों ये जबान फिशल जाती है ओर गुनाह कर बैठता हु ओर...
जब किसी योग्य गुरु के सानिध्य में रह कर गुरु की मेहर से शिष्य में नाद उतपन्न हो वो नाद-लय’ में डूबा हुआ रहता...
राम सन्देश : जनवरी-फ़रवरी, 2012. ...
कल उदास मन था फिर भी चारो ओर रोशनी के माहौल ने मुझे चेता दिया की बाहर के उजाले के उजाले से मन के...
आपने सच ओर अकाट्य सच लिखा है पर कभी कभी जब अपनो की या गुरु की याद आती है और हम अपने इस छोटे...
आं बादशाहे-आलम दर बस्ता बूद महकम…….पोशीद दलक-आदम यअमी कि बर दर आमद!!! अनुवाद – “शहंशाहों के शहंशाह ने शरीर के अंदर बैठकर मजबूती से...
सूरज थकता नहीं, चांद थकता नहीं और हमारा मन भी थकता नहीं। सूरज और चांद एक दिशा में चलते हैं हमारे मन को भी...