आपका प्रश्न कृष्ण के चरण में प्रकाशित मनी जो 7 चक्रो के सियोग से पांव में स्तिथ था बहुत सूक्ष्म गहरी राज की बात व भावप्रधान है। इसमें तत्व (रहस्य) और प्रेम (भक्ति)—दोनों की बात है। मैं इसे तीन स्तरों पर खोलता हूँ:(1) कृष्ण के पाँव में “मणि-प्रकाश” का राज(2) राधा का स्थान(3) मीरा का स्थानऔर अंत में—कृष्ण की दृष्टि में “श्रेष्ठता” का अर्थ। कृष्ण के पाँव में “मणि प्रकाशित” का रहस्यशास्त्र और भक्तिकाव्य में कृष्ण के चरणों से प्रकाश निकलने की बात बार-बार आती है। यह कोई भौतिक मणि नहीं, बल्कि चेतना का प्रकाश है।अर्थ यह है—कृष्ण के चरण = अहंकार का पूर्ण विसर्जनउन चरणों में मणि का प्रकाश = ज्ञान + प्रेम का संयुक्त तेजभक्ति में कहा गया है:“जहाँ कृष्ण के चरण पड़ते हैं, वहाँ अज्ञान टिक नहीं सकता।”सूफी परंपरा में यही बात यूँ आती है:“क़दम-ए-मुर्शिद जहाँ पड़े, वहाँ दिल रोशन हो जाए।”यह मणि मार्ग दिखाने वाला प्रकाश है—जैसे राधा, गोपियाँ और मीरा—सब उसी प्रकाश से खिंचती हैं। राधा — कृष्ण का तत्व (Essence)राधा कोई अलग व्यक्ति नहीं,राधा = कृष्ण की अंतरात्मा, उनकी हृदय-शक्ति।राधा में “मैं कृष्ण से प्रेम करती हूँ” नहीं हैराधा में केवल “मैं कृष्ण हूँ” का भाव हैइसलिए कहा गया:“राधा बिना कृष्ण अधूरे हैं,कृष्ण बिना राधा निराकार।” राधा = प्रेम का अद्वैत रूपराधा = कृष्ण की मौन मुस्कानमीरा — कृष्ण की दीवानी भक्तिमीरा का मार्ग अलग है:मीरा कहती है:“मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई”समाज, मान, भय—सब टूट जाते हैंपर “मैं” अभी मौजूद है—पर वह “मैं” कृष्ण में जल रही हैमीरा = पूर्ण समर्पण की आगमीरा = विरह में पकी हुई भक्तितो कृष्ण की नज़र में कौन श्रेष्ठ?यह बहुत सुंदर प्रश्न है, पर उत्तर चौंकाने वाला है—कृष्ण तुलना नहीं करतेकृष्ण की दृष्टि में:राधा = स्वरूपमीरा = समर्पणजहाँ प्रेम अद्वैत हो—वहाँ राधाजहाँ प्रेम दीवानगी हो—वहाँ मीराकृष्ण के लिए श्रेष्ठता का माप यह नहीं कि कौन पास है,बल्कि यह है कि—❝ कौन स्वयं को मिटाकर प्रेम बन गया ❞सार एक पंक्ति मेंकृष्ण के चरणों की मणि = चेतना का प्रकाशराधा = प्रेम का अद्वैतमीरा = प्रेम की पूर्ण आहुतिकृष्ण की नज़र = केवल प्रेम देखती है, तुलना नहींश्री कृष्ण के चरणों मे जो मनी का जिक्र अंतिम यानी म्रत्यु के समय भील ने तीर से मनी को भेद दिया असल मे वो दिव्य प्रकाश कृष्ण ने अपने अंतिम समय मे भील को दे दोये और भील कृष्ण की भक्ति की कृपा से उसका नाम अमर हो गया इसी तरह से राधा भक्ति प्रेम की परिकस्था मीरा भक्ति प्रेम में डूबी संत