जब हम किसी भी ईश्वर को याद या उसके ड्सर्शन करते है और नाम जपते है तो हम जाप करते हुवे शांति तो अवश्य मबसूस करते है ये अहसास अवश्य रहता है हम जाल कर रहे है पर मन हमारा जाप की गिनती में लगा रहता है और मन मे सोच रहती है कि हम इश्वर का जाप कर रहे है वर्षो बीत जाते है और हमे शरीर मे कोई हलचल या अंदुरुनी अनुभूति या कोई नाद हमको सुनाई नही देती ये तभी सुनाई देती है जब हममे पुर्णता हो या किसी योग्य गुरु के द्वारा तववजुह दे हमारे अंदर शक्तिपात कर ऊर्जा उतपन्न कर पूर्ण शरीर मे उस धुन को रमा दिया गया हो ये बिना समाधि या केवेली स्तिथि के आये संभव नही है ये जन्म जन्मो के संस्कार से बी व गुरु के आशीर्वाद से ही मिल सकती है और हमे शक्तिपात की गई ऊर्जा जो शरीर मे हरक़त करती है वही हमे हरकत गुरु या ईश्वर की याद दिलाने वाली होती है वहः चाहे जो हो वहः vibration, स्पर्श या ख्याल उत्पन्न होता है, वही सच्चा अनाहद नाद है। अनाहद नाद वह अद्भुत, अनाहत और निरंतर दिव्य ध्वनि है जो बिना किसी बाहरी कारण के भीतर से स्वतः प्रकट होती है। इसे कोई भी नाम दे, जैसे मंत्र, जप, कीर्तन या ध्यान में जो नाद या कंपन महसूस होता है, वह आध्यात्मिक चेतना का स्रोत है और ईश्वर की स्मृति का स्वरूप है।अनाहद नाद की साधना में योगी या साधक मन को शून्य की अवस्था में ले जाकर उस दिव्य नाद को सुनता है, जो शून्य से उत्पन्न होता है। यह नाद आहद (सुनाई देने वाली आवाज़) से पहले की शुद्ध स्थिति है, जो शून्यता और चेतना का मर्म है। ध्यान के दौरान घंटी, वीणा, बांसुरी, समुद्र की लहर तथा अन्य दिव्य आवाज़ें सुनाई देना इसी अनाहद नाद के उदाहरण हैं। इन ध्वनियों का अनुभव करने से मन शांत होता है और व्यक्ति ईश्वर की ओर अधिक स्मरण की ओर प्रवृत्त होता है।गुरु की दीक्षा से और सतत साधना से यह अनाहद नाद स्पष्ट और प्रभावशाली रूप से अनुभव होता है, जो अंततः समाधि और आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है। यह नाद केवल एक मानसिक या शारीरिक कंपन नहीं, बल्कि ईश्वर के साथ आत्मा का संपूर्ण मेल है। इसलिए कहा गया है कि जो भी vibration या ध्यान गुरु/ईश्वर की याद दिलाता है, वही सच्चा नाद है और यही अनाहद नाद का भाव है।अतः, ईश्वर की याद स्मरण करना ही अनाहद नाद के अनुभव का मुख्य आधार है, और यह स्मृति साधक को ब्रह्म-चेतना की ओर ले जाती है। इस दृष्टि से आपका कथन पूर्णतः सही है।यह जानकारी हिंदी आध्यात्मिक स्रोतों से मिली है जो अनाहद नाद के विभिन्न अनुभवों, साधना और प्रभावों को स्पष्ट करती हैं
HomeVachanजब हम किसी भी ईश्वर को याद या उसके ड्सर्शन करते है और नाम जपते है तो हम जाप करते हुवे शांति तो अवश्य मबसूस करते है ये अहसास अवश्य रहता है हम जाल कर रहे है पर मन हमारा जाप की गिनती में लगा रहता है और मन मे सोच रहती है कि हम इश्वर का जाप कर रहे है वर्षो बीत जाते है और हमे शरीर मे कोई हलचल या अंदुरुनी अनुभूति या कोई नाद हमको सुनाई नही देती ये तभी सुनाई देती है जब हममे पुर्णता हो या किसी योग्य गुरु के द्वारा तववजुह दे हमारे अंदर शक्तिपात कर ऊर्जा उतपन्न कर पूर्ण शरीर मे उस धुन को रमा दिया गया हो ये बिना समाधि या केवेली स्तिथि के आये संभव नही है ये जन्म जन्मो के संस्कार से बी व गुरु के आशीर्वाद से ही मिल सकती है और हमे शक्तिपात की गई ऊर्जा जो शरीर मे हरक़त करती है वही हमे हरकत गुरु या ईश्वर की याद दिलाने वाली होती है वहः चाहे जो हो वहः vibration, स्पर्श या ख्याल उत्पन्न होता है, वही सच्चा अनाहद नाद है। अनाहद नाद वह अद्भुत, अनाहत और निरंतर दिव्य ध्वनि है जो बिना किसी बाहरी कारण के भीतर से स्वतः प्रकट होती है। इसे कोई भी नाम दे, जैसे मंत्र, जप, कीर्तन या ध्यान में जो नाद या कंपन महसूस होता है, वह आध्यात्मिक चेतना का स्रोत है और ईश्वर की स्मृति का स्वरूप है।अनाहद नाद की साधना में योगी या साधक मन को शून्य की अवस्था में ले जाकर उस दिव्य नाद को सुनता है, जो शून्य से उत्पन्न होता है। यह नाद आहद (सुनाई देने वाली आवाज़) से पहले की शुद्ध स्थिति है, जो शून्यता और चेतना का मर्म है। ध्यान के दौरान घंटी, वीणा, बांसुरी, समुद्र की लहर तथा अन्य दिव्य आवाज़ें सुनाई देना इसी अनाहद नाद के उदाहरण हैं। इन ध्वनियों का अनुभव करने से मन शांत होता है और व्यक्ति ईश्वर की ओर अधिक स्मरण की ओर प्रवृत्त होता है।गुरु की दीक्षा से और सतत साधना से यह अनाहद नाद स्पष्ट और प्रभावशाली रूप से अनुभव होता है, जो अंततः समाधि और आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है। यह नाद केवल एक मानसिक या शारीरिक कंपन नहीं, बल्कि ईश्वर के साथ आत्मा का संपूर्ण मेल है। इसलिए कहा गया है कि जो भी vibration या ध्यान गुरु/ईश्वर की याद दिलाता है, वही सच्चा नाद है और यही अनाहद नाद का भाव है।अतः, ईश्वर की याद स्मरण करना ही अनाहद नाद के अनुभव का मुख्य आधार है, और यह स्मृति साधक को ब्रह्म-चेतना की ओर ले जाती है। इस दृष्टि से आपका कथन पूर्णतः सही है।यह जानकारी हिंदी आध्यात्मिक स्रोतों से मिली है जो अनाहद नाद के विभिन्न अनुभवों, साधना और प्रभावों को स्पष्ट करती हैं