नाद ब्रह्म और ओम में मुख्य अंतर इस प्रकार है:अर्थ और स्वरूप:नाद ब्रह्म वह अनाहत (अघोषित) दिव्य ध्वनि है जो ब्रह्माण्ड के सर्वत्र व्याप्त और निरंतर चल रही है। यह शिव संहिता और योग शास्त्रों में परम चेतना की स्वरूप ध्वनि के रूप में वर्णित है। इसे ध्यान साधना में सूक्ष्म चेतना की ध्वनि भी माना जाता है।ओम एक विशिष्ट मंत्र है, जो नाद ब्रह्म की एक अभिव्यक्ति और स्वरूप है। यह तीन अक्षरों (अ, उ, म) का योग है, जो ब्रह्मांड की सृष्टि, स्थिरता और लय का प्रतीक है। यह सर्वविदित बीज मंत्र है जिसका उच्चारण साधना और ध्यान का माध्यम होता है।उपस्थिति और अनुभव:नाद ब्रह्म की आवाज़ एक अतींद्रिय, निराकार और निरंतर गूंजती हुई ऊर्जा ध्वनि है, जो साधक के आंतरिक अनुभव के आधार पर सुनी और अनुभूत की जा सकती है। यह बाह्य ध्वनि नहीं, बल्कि अंतःकरण से अनुभवित होती है।ओम का उच्चारण एक बाह्य और आंतरिक दोनों प्रक्रिया है, जिससे शरीर और मन में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होते हैं, और यह ध्यान को केंद्रित करता है। ओम की ध्वनि ब्रह्म के परम सत्य का नाम है।साधना और महत्व:नाद ब्रह्म को अधितम योग एवं नादयोग में अनुभवित और साधित किया जाता है, जो आत्मा के परम स्वरूप से जुड़ने का मार्ग है।ओम का जाप सभी धर्म सूत्रों में प्रमुख है, जो साधा-साध्य का सेतु है और ध्यान एवं मंत्र साधना की आधारशिला भी है।संक्षेप में, नाद ब्रह्म वह मूल, निराकार दिव्य ध्वनि है जो सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त है, जबकि ओम उसी नाद ब्रह्म की सर्वमान्य भावध्वनि और संस्कृत बीज मंत्र है, जो साधना द्वारा उच्चतम सत्य की अनुभूति कराता है। दोनों में नाद ब्रह्म व्यापक और अनाहत नाद है, ओम उसका स्वरूप और साधना का माध्यम है

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