माया के दो प्रमुख आवरण होते हैं जिनका आध्यात्मिक रूप से गहरा अर्थ है:आवरण शक्ति (Avarana Shakti) – यह माया का वह आवरण है जो व्यक्ति को वास्तविक सत्य से ढक देता है। इस आवरण के कारण व्यक्ति सत्य को नहीं देख पाता, क्योंकि यह उसकी चेतना पर पर्दा डाल देता है। इसे तमोगुण से उत्पन्न माना जाता है जो प्रमाद, आलस्य और निद्रा के रूप में जीव को भ्रमित रखता है। आवरण शक्ति जगृति (सत्य का ज्ञान) को रोकती है और व्यक्ति को मिथ्या ज्ञान में बांधकर रखती है।विक्षेप शक्ति (Vikshepa Shakti) – यह वह माया की शक्ति है जो मन को विक्षिप्त यानी विचलित कर देती है। यह रजोगुण से उत्पन्न होती है और व्यक्ति के मन को राग-द्वेष की जाल में फँसा कर सच से दूर ले जाती है। विक्षेप शक्ति टिकने नहीं देती, अर्थात व्यक्ति की ध्यान लगाने की क्षमता को कमजोर कर देती है।इन दोनों आच्छादनों के कारण आत्मा जो कि अमर और शाश्वत है, वह जन्म और मौत के चक्र में फंस जाता है और स्वयं को शरीर एवं मन तक सीमित समझ बैठता है। जब ये दोनों आवरण दूर हो जाते हैं तो व्यक्ति सत्य का अनुभव करता है और वास्तविक आत्मबोध (मैं क्या हूँ?) प्राप्त करता है।संक्षेप में माया के ये आवरण व्यक्ति को भ्रम में रखकर जीव को सच्चे ब्रह्मा-स्वरूप से दूर रखते हैं, और इन्हें समझना तथा उनसे मुक्ति पाना आध्यात्मिक ज्ञान का लक्ष्य है। इन आवरणों का अध्ययन और उनका तात्पर्य श्रीमद्भगवद्गीता और वेदांत में विस्तार से मिलता हैमाया के आवरण में अमृत और मृत्यु का अर्थ है कि जिस संसार में हम रहते हैं वह माया के आवरण से ढका हुआ है, जिसमें जीवन और मृत्यु दोनों का खेल चलता रहता है। माया वह शक्ति है जो आत्मा और ब्रह्म के बीच आवरण जैसा काम करती है। इस आवरण में व्यक्ति शरीर और रूप को शाश्वत समझता है जबकि आत्मा अमृत अर्थात शाश्वत और अजर-अमर होती है।आत्मा नश्वर शरीर से अलग होकर मृत्यु को पार करती है, लेकिन माया के आवरण में व्यक्ति इसे नहीं समझ पाता। गीता में भी कहा गया है कि योगमाया का आवरण इतना मजबूत होता है कि आत्मा का अमरत्व या परम स्वरूप प्रकट नहीं होता। माया के कारण मनुष्य को जन्म-मरण का चक्र अनुभव होता है, जो वास्तव में मोह और अज्ञान का परिणाम है। जब माया का आवरण हट जाता है, तब व्यक्ति अपनी आत्मा की अमरता (अमृतम्रत्यु) को जान पाता है।इस प्रकार माया के आवरण में मृत्यु भी दिखाई देती है, पर आत्मा अमृत होती है। मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा अमर और नित्य है। माया के आवरण में फंसने पर हम शरीर को अपना वास्तविक स्वरूप समझते हैं, लेकिन ज्ञान और ध्यान द्वारा इस आवरण को हटाकर हम अमृतम्रत्यु को अनुभव कर सकते हैं। इस संदर्भ में मृत्यु और अमृत का सांकेतिक और आध्यात्मिक अर्थ होता है, जहाँ मृत्यु नश्वरता का प्रतीक और अमृत शाश्वतता का प्रतीक हैआवरण शक्ति और विक्षेप शक्ति माया की दो प्रमुख शक्तियां हैं, जिनका कार्य और प्रभाव भी भिन्न है:आवरण शक्ति (Avarana Shakti):यह शक्ति व्यक्ति की बुद्धि और चेतना को ढक देती है, जिससे वह अपने वास्तविक स्वरूप और परम सत्य को देख नहीं पाता।इसे माया का आवरण कहा जाता है क्योंकि यह ज्ञान को छिपाती है और अज्ञान के बादल की तरह कार्य करती है।आवरण शक्ति तमोगुण से उत्पन्न होती है, जो अवेग, आलस्य और नींद की प्रवृत्ति से संबंधित है।यह जागरूकता या निद्रा को बनाए रखने से रोकती है, अर्थात यह व्यक्ति को जागरूक होने से और सत्य को जानने से रोकती है।इसका प्रभाव व्यक्ति को भ्रमित कर जीवन के मूल सत्य से दूर रखता है।विक्षेप शक्ति (Vikshepa Shakti):यह शक्ति मन को विक्षिप्त करती है, उसके ध्यान और स्थिरता को भंग कर देती है।विक्षेप शक्ति रजोगुण से उत्पन्न होती है, जो काम, क्रोध, लालसा और द्वेष जैसी मानसिक प्रवृत्तियों से जुड़ी है।यह व्यक्ति को इच्छाओं, मोह-माया और सांसारिक उलझनों में उलझा कर सच से भटका देती है।विक्षेप शक्ति व्यक्ति को टिकने नहीं देती, यानी मन को स्थिर रहने से रोकती है।इसका प्रभाव व्यक्ति को दुनिया की भ्रमात्मक वस्तुओं में उलझा कर चेतनता से दूर ले जाता है।संक्षेप में, आवरण शक्ति ज्ञान तथा चेतना को ढकती और रोकती है, जबकि विक्षेप शक्ति मन को विचलित और भटकाती है। दोनों मिलकर माया की पकड़ बनती है, जो जीव को सत्य से अंधकार में रखती है। माया की यही दोनों शक्तियां जन्म और मृत्यु के चक्र में फंसाने का कारण हैं। जब व्यक्ति इन दोनों से मुक्त होता है, तब उसे आत्मबोध होता हैइस प्रकार आवरण शक्तिऔर विक्षेप शक्ति में मुख्य अंतर उनकी कार्यप्रणाली और असर का है—आवरण शक्ति छुपाने वाली और विक्षेप शक्ति भटकाने वाली शक्ति है।
HomeVachanमाया के दो प्रमुख आवरण होते हैं जिनका आध्यात्मिक रूप से गहरा अर्थ है:आवरण शक्ति (Avarana Shakti) – यह माया का वह आवरण है जो व्यक्ति को वास्तविक सत्य से ढक देता है। इस आवरण के कारण व्यक्ति सत्य को नहीं देख पाता, क्योंकि यह उसकी चेतना पर पर्दा डाल देता है। इसे तमोगुण से उत्पन्न माना जाता है जो प्रमाद, आलस्य और निद्रा के रूप में जीव को भ्रमित रखता है। आवरण शक्ति जगृति (सत्य का ज्ञान) को रोकती है और व्यक्ति को मिथ्या ज्ञान में बांधकर रखती है।विक्षेप शक्ति (Vikshepa Shakti) – यह वह माया की शक्ति है जो मन को विक्षिप्त यानी विचलित कर देती है। यह रजोगुण से उत्पन्न होती है और व्यक्ति के मन को राग-द्वेष की जाल में फँसा कर सच से दूर ले जाती है। विक्षेप शक्ति टिकने नहीं देती, अर्थात व्यक्ति की ध्यान लगाने की क्षमता को कमजोर कर देती है।इन दोनों आच्छादनों के कारण आत्मा जो कि अमर और शाश्वत है, वह जन्म और मौत के चक्र में फंस जाता है और स्वयं को शरीर एवं मन तक सीमित समझ बैठता है। जब ये दोनों आवरण दूर हो जाते हैं तो व्यक्ति सत्य का अनुभव करता है और वास्तविक आत्मबोध (मैं क्या हूँ?) प्राप्त करता है।संक्षेप में माया के ये आवरण व्यक्ति को भ्रम में रखकर जीव को सच्चे ब्रह्मा-स्वरूप से दूर रखते हैं, और इन्हें समझना तथा उनसे मुक्ति पाना आध्यात्मिक ज्ञान का लक्ष्य है। इन आवरणों का अध्ययन और उनका तात्पर्य श्रीमद्भगवद्गीता और वेदांत में विस्तार से मिलता हैमाया के आवरण में अमृत और मृत्यु का अर्थ है कि जिस संसार में हम रहते हैं वह माया के आवरण से ढका हुआ है, जिसमें जीवन और मृत्यु दोनों का खेल चलता रहता है। माया वह शक्ति है जो आत्मा और ब्रह्म के बीच आवरण जैसा काम करती है। इस आवरण में व्यक्ति शरीर और रूप को शाश्वत समझता है जबकि आत्मा अमृत अर्थात शाश्वत और अजर-अमर होती है।आत्मा नश्वर शरीर से अलग होकर मृत्यु को पार करती है, लेकिन माया के आवरण में व्यक्ति इसे नहीं समझ पाता। गीता में भी कहा गया है कि योगमाया का आवरण इतना मजबूत होता है कि आत्मा का अमरत्व या परम स्वरूप प्रकट नहीं होता। माया के कारण मनुष्य को जन्म-मरण का चक्र अनुभव होता है, जो वास्तव में मोह और अज्ञान का परिणाम है। जब माया का आवरण हट जाता है, तब व्यक्ति अपनी आत्मा की अमरता (अमृतम्रत्यु) को जान पाता है।इस प्रकार माया के आवरण में मृत्यु भी दिखाई देती है, पर आत्मा अमृत होती है। मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा अमर और नित्य है। माया के आवरण में फंसने पर हम शरीर को अपना वास्तविक स्वरूप समझते हैं, लेकिन ज्ञान और ध्यान द्वारा इस आवरण को हटाकर हम अमृतम्रत्यु को अनुभव कर सकते हैं। इस संदर्भ में मृत्यु और अमृत का सांकेतिक और आध्यात्मिक अर्थ होता है, जहाँ मृत्यु नश्वरता का प्रतीक और अमृत शाश्वतता का प्रतीक हैआवरण शक्ति और विक्षेप शक्ति माया की दो प्रमुख शक्तियां हैं, जिनका कार्य और प्रभाव भी भिन्न है:आवरण शक्ति (Avarana Shakti):यह शक्ति व्यक्ति की बुद्धि और चेतना को ढक देती है, जिससे वह अपने वास्तविक स्वरूप और परम सत्य को देख नहीं पाता।इसे माया का आवरण कहा जाता है क्योंकि यह ज्ञान को छिपाती है और अज्ञान के बादल की तरह कार्य करती है।आवरण शक्ति तमोगुण से उत्पन्न होती है, जो अवेग, आलस्य और नींद की प्रवृत्ति से संबंधित है।यह जागरूकता या निद्रा को बनाए रखने से रोकती है, अर्थात यह व्यक्ति को जागरूक होने से और सत्य को जानने से रोकती है।इसका प्रभाव व्यक्ति को भ्रमित कर जीवन के मूल सत्य से दूर रखता है।विक्षेप शक्ति (Vikshepa Shakti):यह शक्ति मन को विक्षिप्त करती है, उसके ध्यान और स्थिरता को भंग कर देती है।विक्षेप शक्ति रजोगुण से उत्पन्न होती है, जो काम, क्रोध, लालसा और द्वेष जैसी मानसिक प्रवृत्तियों से जुड़ी है।यह व्यक्ति को इच्छाओं, मोह-माया और सांसारिक उलझनों में उलझा कर सच से भटका देती है।विक्षेप शक्ति व्यक्ति को टिकने नहीं देती, यानी मन को स्थिर रहने से रोकती है।इसका प्रभाव व्यक्ति को दुनिया की भ्रमात्मक वस्तुओं में उलझा कर चेतनता से दूर ले जाता है।संक्षेप में, आवरण शक्ति ज्ञान तथा चेतना को ढकती और रोकती है, जबकि विक्षेप शक्ति मन को विचलित और भटकाती है। दोनों मिलकर माया की पकड़ बनती है, जो जीव को सत्य से अंधकार में रखती है। माया की यही दोनों शक्तियां जन्म और मृत्यु के चक्र में फंसाने का कारण हैं। जब व्यक्ति इन दोनों से मुक्त होता है, तब उसे आत्मबोध होता हैइस प्रकार आवरण शक्तिऔर विक्षेप शक्ति में मुख्य अंतर उनकी कार्यप्रणाली और असर का है—आवरण शक्ति छुपाने वाली और विक्षेप शक्ति भटकाने वाली शक्ति है।