विभिन्न धर्मों में “मरने से पहले मरना” का अर्थ भले ही थोड़ा अलग हो, लेकिन पिताजी का आध्यात्मिक साधना में इसका मूल अर्थ व उनके भाव एक ही है: सांसारिक अहंकार, मोह, और नश्वरता को छोड़कर आध्यात्मिक जागृति या मुक्ति प्राप्त करना।बौद्ध धर्म में इसका मतलब है अपनी मृत्यु का सामना करना, यानी नश्वरता को स्वीकार कर अहंकार से मुक्त हो जाना, जो मृत्यु का केवल भौतिक अंत नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक जागृति है। यह स्थिति भय से ऊपर उठने की होती है, जहां मन शांति और संतोष में रहता है।हिंदू धर्म में यह विचार मोक्ष या मुक्त होने से जुड़ा है, जहां सांसारिक बंधनों, इच्छाओं, और अहंकार को मरने से पहले छोड़ कर आत्मा की शाश्वत चेतना के साथ एकात्मता प्राप्त होती है। गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्र मृत्युपूर्व के संकेतों और कर्म चक्र के अंत की ओर ध्यान दिलाते हैं।सूफी और अन्य ध्यानात्मक रास्तों में “मरने से पहले मरना” का मतलब भी सांसारिक मोह-माया से दिव्य प्रेम और परम सत्य के प्रति जागरूक होना है।ईसाइयत में भी मृत्यु पूर्व पापों की शुद्धि और आत्मा की शांति की अवधारणा मिलती है, जो पुनर्जन्म से परे स्वर्ग की ओर यात्रा की तैयारी मानी जाती है।इस प्रकार, सभी धर्मों में “मरने से पहले मरना” का अभिप्राय सांसारिक जीवन और अहंकार के बंधनों को छोड़ कर एक आध्यात्मिक जागरूकता, शांति, और मुक्ति की अवस्था में प्रवेश करना है। यह केवल शारीरिक मृत्यु नहीं, बल्कि मन, चेतना और भावना का एक नया जन्म है, जो मृत्यु के बाद भी अनश्वर रहता है

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