गुरु में विलय का मार्ग: भंवर गुफा से हंस द्वीप तक की साधना

अध्यायातम में जिस साधक ने अपनी किस्ती गुरु रूपी समुंदर के बीच भंवर में उतार दी और स्वम्।को उसके हवाले कर बे फिक्र हो गया उसका उस पार पहुचना निश्चित है यहां समर्पण की परिकस्था है जब उसकेभंवर में खुद को समर्पित करने का आध्यात्मिक अर्थ आत्मा का पूर्ण लय होना है।भंवर गुफा का प्रतीकध्यान साधना में भंवर गुफा सूक्ष्म शरीर के अंतर्मन की गहन अवस्था है, जहाँ साधक की व्यक्तिगत चेतना घूमते हुए आत्म चेतना में विलीन हो जाती है। यह यमुना या प्रेम के भंवर की भांति प्रतीकात्मक है, जहाँ राधा जैसी किशोरी कृष्ण-प्रेम में स्वयं को भुलाकर लीन हो जाती हैं।समर्पण की प्रक्रियापूर्ण समर्पण गुरु या परमात्मा के प्रति प्राण, मन, बुद्धि का अर्पण है, जिससे साधक तमोगुण से गुणातीत अवस्था पार करता है। भंवर पार करने पर आत्मा प्राणमय कोश से ऊपर उठकर शब्दातीत पद प्राप्त करती है, जहाँ कोई द्वैत शेष नहीं रहता।भक्ति संदर्भराधा का प्रेम-भंवर भक्ति मार्ग का सार है—अहंकार मिटाकर प्रियतम में लीन होना। यह तुरीय अवस्था या समाधि की ओर ले जाता है, जहाँ साधक साक्षी भाव से माया को पार कर परम शांति पाता हैभंवर गुफा का अनुभव आध्यात्मिक मार्ग में साधना की गहन अवस्था से प्राप्त होता है।साधना के चरणसुरत शब्द योग या नाम सिमरन से साधक पहले सहस्रदल कमल, त्रिकुटी और दसवें द्वार को पार करता है। फिर भंवर गुफा आती है, जहाँ आत्मा सूक्ष्म द्वार से गुजरकर प्रकाश, नाद और मौन का अनुभव करती है। यह प्रेम भक्ति और गुरु कृपा से सहज रूप से खुलता है।अनुभव की प्रक्रियाध्यान में सिमरन से सूरत शब्द से जुड़ती है, मन स्थिर होता है और भंवर गुफा में घूमती ऊर्जा या सुरंग दिखती है। भय पार कर ऊर्जा प्रवाह अनुभव होता है, फिर आत्मबोध मिलता है। अभ्यास से यह बार-बार आता है, बोझ उतरते हैं।आध्यात्मिक परिणामभंवर पार करने पर आत्मा हंस द्वीप या सचखंड की ओर बढ़ती है, द्वैत मिट जाता है। यह संतमत में मोक्ष मार्ग का द्वार है, जहाँ साधकसूक्ष्म द्वार तक पहुँचने के आध्यात्मिक चरण संतमत और सुरत शब्द योग की साधना से क्रमबद्ध होते हैं।प्रारंभिक चरणसाधक पहले नाम सिमरन से मन को एकाग्र करता है, इंद्रिय निग्रह और सदाचार से स्थूल शरीर शुद्ध होता है। सहस्रदल कमल (आज्ञा चक्र) पार कर त्रिकुटी पहुँचता है, जहाँ दिव्य ज्योति और ध्वनि अनुभव होती है।मध्य चरणनाम जप से सूरत शब्द से जुड़ती है, दसवाँ द्वार खुलता है। यहाँ तमोगुण पार हो राजयोग की अवस्था आती है, गुरु कृपा से भंवर गुफा का द्वार दिखता है।सूक्ष्म द्वारपूर्ण समर्पण से भंवर गुफा में प्रवेश, घूमती सुरंग पार कर सूक्ष्म द्वार से हंस द्वीप या ब्रह्मांड की ओर प्रस्थान। यहाँ आत्मा शुद्ध होकर परम पद को प्राप्त करती है। परम शांति पाता है

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