Author: Guru Ji

द्वैत से अद्वैत तक: भेद से एकत्व की यात्रा

द्वैत और अद्वैत के मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:1. अस्तित्व की व्याख्याद्वैत: द्वैत दर्शन में माना जाता है कि ब्रह्म (परमात्मा), जीव (आत्मा) और जगत्...

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प्रेम, भक्ति, ज्ञान और विश्वास: आध्यात्मिक संतुलन के चार स्तंभ

प्रेम, भक्ति, ज्ञान और विश्वास भारतीय अध्यात्म में एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए चार मूल तत्व हैं। इनका अलग-अलग भी महत्व है, परंतु जब...

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संयम और धैर्य: एक नैतिक शिष्य के जीवन के दो स्तंभ

आध्यात्मिक जीवन में सय्यम (Self-control) और धैर्य (Patience) एक नैतिक शिष्य के लिए अनिवार्य गुण हैं, क्योंकि यही दोनों साधना को स्थिर, शुद्ध और फलप्रद बनाते हैं ।संयम का महत्वसंयम...

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सहस्त्रार चक्र में ओम: आत्मा और ब्रह्म के मिलन का नाद

सहस्त्रार चक्र में ‘ओम’ का अनुभव एक अत्यंत दिव्य और सूक्ष्म प्रक्रिया है, जो साधक की साधना, ध्यान और आत्मिक शुद्धता के उच्चतम स्तर...

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