आध्यात्मिक दृष्टि से जब आत्मा अपने सीमित “मैं” से ऊपर उठकर चेतन्य स्वरूप का अनुभव करती है, तब साधक को ऐसा प्रतीत होता है...
अध्यात्म में अंधभक्ति का कोई स्थान नहीं होता। सच्चा आध्यात्म जागृति, अनुभव, अनुशासन और समर्पण का मार्ग है। यहाँ केवल बाहरी दिखावा या भीड़...
एक आध्यात्मिक रूह जब रूहानी रूह बनती है, तो उसका सफर शब्दों से नहीं, अनुभवों से लिखा जाता है। वह लोक आँखों से नहीं...
अगर हो सच्चे भक्त, तो सर पर कफ़न बाँध गुरु के संग चल पड़ो फिर ये ख्याल दिल।मे न हो कि हमने सही चुना...
मैं चला था अपना विनास करने रास्ते मे मन डॉ गया बनना चाहता था स्वार्थी पर उसका अभ्यर्थी बन सन्यास योग ले लिया ये...
“मैं” जब अहंकार बन जाती है, तब वही सबसे बड़ा पर्दा अध्यायातम में बनती है। और जब “मैं” समर्पण बन जाती है , तब...
“मैं” जब अहंकार बन जाती है, तब वही सबसे बड़ा पर्दा अध्यायातम में बनती है। और जब “मैं” समर्पण बन जाती है , तब...
अंक केवल गणना के चिन्ह नहीं हैं, अनेक आध्यात्मिक परंपराओं में इन्हें चेतना, ऊर्जा और सृष्टि के प्रतीक माना गया है। से 10 तक के अंक जीवन, प्रकृति और
सहस्रार चक्र और “दसम द्वार” को कई परंपराएँ एक-दूसरे से जोड़ती हैं, पर सूक्ष्म दृष्टि से दोनों में थोड़ा अंतर भी माना गया है।...