श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला का दिव्य उपदेश है। महाभारत के युद्धक्षेत्र कुरुक्षेत्र में जब अर्जुन अपने कर्तव्य...
उपनिषद और संतमत का अत्यंत गूढ़ विषय है। ध्यान रहे कि विभिन्न परंपराओं में इसके वर्णन अलग-अलग हैं, इसलिए इसे एक आध्यात्मिक दृष्टि के...
संतमत, सूफ़ी मत, वेदांत और पतंजलि योग को साथ रखकर देखें तो एक गहरी समानता दिखाई देती है। शब्द अलग हैं, लेकिन अनेक साधक...
तेरे दर से गुज़रने से पहले मैं होश में था या बेहोश, यह मुझे भी कहाँ पता था। तेरे दर पर आकर ऐसा मदहोश...
भारतीय योग, आयुर्वेद और तत्त्वज्ञान के अनुसार मानव शरीर पाँच महाभूतों (पंचतत्त्व) से बना है। प्रत्येक तत्त्व का अपना कार्य और प्रधान समय माना...
आपका प्रश्न बहुत गहरा है। विभिन्न परंपराएँ—पतंजलि योग, उपनिषद, अद्वैत वेदांत, नाथ योग, संतमत और भक्ति परंपरा—इन पड़ावों को अलग-अलग शब्दों में बताती हैं,...
“जिस प्रकार समुद्र की गहराइयों में हजारों प्रकार के जीव रहते हैं, जिन्हें हम अपनी आँखों से नहीं देख पाते, उसी प्रकार मन की...
समुंदर में उठती लहरों को पार कर, ज़माने की बनाई दीवारों को लाँघ कर, मैं उस सफ़र की ओर निकल पड़ा हूँ, जो सीधे...
mera ये कथन एक गहरी सोच की ओर संकेत करता है। अनेक संत परंपराओं में कहा गया है कि जब “मैं” (अहंकार), वासनाएँ, और...
मैं मैं को भूल तू को भूल गया जिसे अलुफ कहते हो गया पर विसवास वो जम गया जो हो न हो मुझे कोई...