November 29, 2025 कर्मयोग का सार: श्रीकृष्ण के उपदेश और ईश्वर-स्मरण का दिव्य मार्ग कर्मयोग को श्रीकृष्ण यो मूल श्लोकभगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 47 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥... Read More
November 28, 2025 जब इश्क बन जाए आध्यात्मिक मार्ग: प्रेम से परमात्मा तक की यात्रा इश्क को आध्यात्मिक मार्ग में परिवर्तित करने के लिए सबसे पहले उसे संसारिक मोह से अलग कर परमात्मा या गुरु के प्रति निष्काम भक्ति... Read More
November 27, 2025 भौतिक संसार में रहकर भी आध्यात्मिक बने रहना: कर्म योग का सुंदर संदेश भौतिक दुनिया के कर्म करते हुए अपने को अध्यात्म में लय रखना मतलब बिना स्वार्थ के, पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर्म करना... Read More
November 26, 2025 आंख, कान और मन की शांति: भीतर जागने का दिव्य मार्ग चश्म बंदों गोशबन्दों लब बंदोगर न बिनी सिर्रेबर मन बखंदयह पंक्ति दरअसल कबीर या किसी सूफ़ी/भक्ति संत की रचना हो सकती है जिसमें मन... Read More
November 26, 2025 मरने से पहले मरना: आत्मिक जागृति का सुंदर संदेश विभिन्न धर्मों में “मरने से पहले मरना” का अर्थ भले ही थोड़ा अलग हो, लेकिन पिताजी का आध्यात्मिक साधना में इसका मूल अर्थ व... Read More
November 26, 2025 तरीकत की सर्वोच्च अवस्था: आत्मा का दिव्य जागरण अध्यात्म में तरीकत की सर्वोच्च अवस्था वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपने अहंकार और निचले स्वभाव से पूरी तरवह ऊपर उठकर ईश्वर के साथ... Read More