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गुरु एक जागृत ईश्वर है

 गुरु एक जागृत ईश्वर है, जो शिष्य के भीतर सुप्त ईश्वर को जगा रहा है।” कितना सुंदर है न यह? “दया तथा गहन अंतर्दृष्टि...

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गुरु और शिष्य के बीच

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर: । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः” प्राचीन काल में गुरु और शिष्य के संबंधों का आधार था...

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चेतना और साधना

चेतना और साधना हम जिस प्रकार सोच और महसूस कर रहे हैं उससे केवल निरन्तर बंधन का जाल निर्मित किए जा रहे हैं। वे...

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योग्य गुरु

किसी भी योग्य गुरु जो आपकी राय में गुरु कहलाने लायक ओर गुरु बनने के गुण या योग्यता रखता है निष्काम निर्पेक्ष स्वार्थ रहित...

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गीता सार

गीता सार क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा ना पैदा होती है, न मरती...

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