आध्यात्मिक जीवन में सय्यम (Self-control) और धैर्य (Patience) एक नैतिक शिष्य के लिए अनिवार्य गुण हैं, क्योंकि यही दोनों साधना को स्थिर, शुद्ध और फलप्रद बनाते हैं ।संयम का महत्वसंयम...
।आत्म-संयम, आध्यात्मिक आराधना और गुरु-कृपा — ये तीनों मिलकर आत्म-जागरण और मोक्ष की दिशा का निर्माण करते हैं।आत्म-संयमआत्म-संयम का अर्थ है—इंद्रियों, मन और इच्छाओं...