May 17, 2025 मोक्ष का मार्ग: अद्वैत वेदांत की दृष्टि से आत्मा की यात्रा जीवन और मरण से मुक्ति, जिसे अक्सर मोक्ष या निर्वाण कहा जाता है, भारतीय दर्शन और आध्यात्मिकता में एक गहन अवधारणा है। यह चक्रवर्ती... Read More
May 17, 2025 मन का संयम, आत्मा की मुक्ति: वैराग्य की ओर पहला कदम मन पर नियंत्रण कैसे करे और विकार रहित कैसे हो मोह-माया से विरक्ति प्राप्त करने के लिए भारतीय दर्शन, विशेष रूप से योग और... Read More
May 17, 2025 धर्म और समाज: गीता की दृष्टि में गृहस्थ जीवन की महत्ता गीता के संदर्भ में धर्म और समाज का गहरा संबंध है। धर्म, गीता में, केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत और... Read More
May 17, 2025 गृहस्थ आश्रम: कर्म, धर्म और भक्ति का समन्वय भगवद्गीता में चार आश्रमों—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, और संन्यास—का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, क्योंकि गीता मुख्य रूप से कर्मयोग, भक्तियोग, और ज्ञानयोग पर केंद्रित है।... Read More
May 17, 2025 गुरु-शिष्य का बंधन: ज्ञान, श्रद्धा और आत्मिक विकास का सेतु गुरु-शिष्य का संबंध बहुत ही पवित्र और अनूठा होता है, जो पिता-पुत्र, माँ-बेटा या अन्य किसी रिश्ते से अलग लेकिन उतना ही गहरा और... Read More
May 17, 2025 जब मन शून्य हो जाए: वहीं परमात्मा की अनुभूति है पिताजी बहुत कम बोलते थे और कुछ कहते उसे विस्तार से समझाते थे उनका कहना था कि एक शिष्य का मुख्य धर्म है गुरु... Read More