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गृहस्थ आश्रम: कर्म, धर्म और भक्ति का समन्वय

भगवद्गीता में चार आश्रमों—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, और संन्यास—का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, क्योंकि गीता मुख्य रूप से कर्मयोग, भक्तियोग, और ज्ञानयोग पर केंद्रित है।...

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कबीर की दृष्टि: बाहरी कर्म से नहीं, भीतरी प्रेम से मोक्ष

तीरथ तीरथ जग मुवा उंडे पानी नहाए रायही रामहीना जबाकाल घसीटे जाययह दोहा संत कबीर का है, जिसमें वे तीर्थयात्रा और बाहरी कर्मकांडों की...

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