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संजय व खाटू श्याम दिव्य दृसटामहाभारत, भक्ति परंपरा और आध्यात्मिक चेतना—तीनों को जोड़ता है। इसे कथा, प्रतीक और आध्यात्मिक रहस्य—तीनों स्तरों पर समझना उचित...

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अहं से परे भक्ति: केवट और शबरी के प्रेम से आत्म-जागरण

केवट और शबरी —रामायण में घटनाएँ नहीं,चेतना की अवस्थाएँ हैं। केवट और शबरी का प्रेम : आध्यात्मिक अर्थकेवट — “मैं डुबा था, अब नहीं”केवट...

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गरुड़ पुराण और आत्मा की यात्रा: कर्म से मुक्ति तक

यह विषय डर या दंड का नहीं,चेतना–परिवर्तन और कर्म-बोध का है।गरुड़ पुराण को भयग्रंथ नहीं,मृत्यु–उपदेश की तरह पढ़ें।गरुड़ पुराण : आध्यात्मिक पाठ(मृत्यु के बाद...

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