“जीवित वीतरागी” का अर्थ है – ऐसा साधक या महापुरुष जो जीवन रहते हुए (शरीर सहित) राग-द्वेष से मुक्त हो चुका है।अध्यातम दुनिया मे...
“मानव है और मानवता ही धर्म है” इस विचार का अर्थ है कि मानव होने का सार मानवता में निहित है, और मानवता ही...
आदरणीय राठौर अंकल मेरी समझ के अनुसार आत्मा के साथ जो सूक्ष्म शरीर रहता है वही सुख दुख स्वर्ग नरक को अनुभव करता है...
मैं आत्मा हु ओर साधना से मुझे समझ मे आ गया कि भूमि।पानी आग वायु और आकाश इन सब से अलग मेरा आत्मा का...
समाधि की उच्च अवस्था जहा न मैं न तो बस है तो प्रकाश बिंदु ओर कुछ नही अंधेरा गम हो।कर एक प्रकाश बिंदु शेष...
मैंके साथ मैं मिल सकता है पर मैनके साथ तू नहीं इ स पंक्ति में बहुत गहरी दार्शनिक और आध्यात्मिक प्रतीति है। इसका अभिप्राय...
गुरु-शिष्य संपर्क मृत्यु के बाद भी प्रभावित रहता है और गहरा बना रहता है। गुरु-शिष्य का संबंध केवल एक जन्म या जीवनकाल तक सीमित...
जब स्थूल शरीर के रहते सूक्ष्म शरीर इस भौतिक दुनिया में अन्य स्थूल शरीर से मिलने निकलता है, तो दोनों स्थूल शरीरों को अपनी-अपनी...
जब शरीर की आत्मा गहन समाधि अवस्था मे पहुच जाती है और उस स्थान पर पहुच जाती है जहाँ से लौटना असम्भव है ये...
हवाओं का वो झोंका, जो तेरे नाम की खुशबू लिए आए,जैसे सहर की नर्म चादर है, जो रूह को छू जाए।शहर-से मेरा दिल थम...