ही तू है” का अर्थ है – साधक को हर जगह वही परमात्मा, वही चेतना, वही ईश्वर दिखाई देता है।जब दृष्टि भीतर से निर्मल...
सूर्य और “ॐ”ऋग्वेद, उपनिषद और योगशास्त्र में कहा गया है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक ही मूल ध्वनि “ॐ” (प्रणव) से स्पंदित है सूर्य को...
भक्ति से शुरू होकर समाधि और अंत में नाद ब्रह्म तक पहुँचना। यह मार्ग एक साधक के लिए सबसे महत्वपूर्ण और transformative (रूपांतरकारी) होता...
मनुष्य जन्म।लेने के बाद कर्म के अनुसार जन्म।लेता है और जन्म।के समय पूर्व कर्मो के अनुसार घर चुन जन्म।ले कर बड़ा होता है और...
वेदों में गुरु का महत्व और योगदान आध्यात्मिकता के संदर्भ में अत्यंत उच्च माना गया है। गुरु को आध्यात्मिक मार्ग का पथ-प्रदर्शक, ज्ञान का...
ध्यान योग (Meditation Yoga) में आत्मा की मुक्ति साक्षीभाव व समाधि द्वारा प्राप्त होती है। अंतिम अवस्था: निर्विचार समाधि / सहज समाधिमन के समस्त...
अध्यात्म में “खाक में मिलना” एक गहन और प्रतीकात्मक अवधारणा है, जो आत्मा, जीवन और मृत्यु के चक्र से जुड़ी है। यह वाक्यांश सामान्य...
जब कोई व्यक्ति जीवन की अंतिम अवस्था ओर अध्यआत्मिक्ता के उच्च शिखर पर पहुच वियरगी बन संसार से विरक्त हो इस स्थिति को प्राप्त...
देवयान गति” (Devayana gati) भारतीय दर्शन, विशेष रूप से उपनिषदों और वेदांत में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। इसे मृत्यु के बाद आत्मा के यात्रा...
अद्यतमिक योग में महर्षि पतंजलि के द्वारा योग के आठ अंग बताये गए हैयमनियमआसनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधिये आठ सीढ़िया है जो हमे अद्यतमिक योग में ऊंचाई पर...