शांगरी-ला घाटी महाभारत में प्रत्यक्ष रूप से “शांगरी-ला” नाम से नहीं उल्लिखित है, बल्कि इसे सिद्धाश्रम या ज्ञानगंज के रूप में वर्णित किया गया...
आत्मा व परमात्मा की पहचानवेदांत की परंपरा में ठीक यही सिद्धांत प्रतिपादित है—आत्मानं विद्धि (आत्मा को जानो), क्योंकि आत्मा ही परमात्मा का प्रतिबिंब है।...
विवेक वेदांत दर्शन में आत्मा-अनात्मा, सत्य-असत्य या नित्य-अनित्य के भेद की बुद्धि है। यह साधना चतुष्टय का प्रथम अंग है, जो संसार की मिथ्या...
अव्यक्तं व्यक्तमापन्नं मन्यन्ते मामअभुद्दयः ।परं भावमजानन्तो मम सर्वं यथा भवति तत् ॥ २४ ॥भगवान कहते हैं – अज्ञानी मुझे अव्यक्त (निर्गुण) से व्यक्त (सगुण)...
मृत्यु के अंतिम समय में या उसके बाद लंबे समय तक सच्चे रूप से याद रखने वाले मुख्यतः करीबी परिवारजन जैसे पत्नी, बच्चे और...
।एक साधक जब शून्य में पूरी तरह खो जाता है, तो वह केशून्य (पूर्ण शून्यता), मोह भंग (मोह का नाश) और निर्लिप्त (सर्वस्व से...
वेदों में अनहद नाद का वर्णन अप्रत्यक्ष रूप से ‘नाद ब्रह्म’ या आदि शब्द के रूप में मिलता है, जो सृष्टि की मूल ध्वनि...
मेरे पिताजी का अपने शिष्यों को कहा करते थे अध्यायातम में “मर जाओ इससे पहले कि मौत तुम्हें मार दे”। यह अहंकार त्यागकर विनम्र...
सूफी फकीरों मो जिये जी मरने को सुंम बुक उम अध्यायातम में ध्यान में आंखे मुह ओर कान बाद कर अंदुरुनी आवज नाद के...
जीवात्मा के भीतर “अज़म” शब्द गुप्त रूप से विद्यमान है, अर्थात् वहाँ वह स्वरूप में छिपा हुआ है। लेकिन कमील दरवेश (पूर्ण संत या...