मैं वो सिकंदर नहीं जो खाली हाथ लौट गया,
मैं वो हूँ जो तेरी रहमत का ख़ज़ाना लिए जाऊँगा।
जिसे दुनिया दौलत समझ न सकी,
मैं वो तेरे नाम का नूर दिल में बसाए जाऊँगा।
न ताज चाहिए, न तख़्त की ख्वाहिश है मुझे,
बस तेरी एक नज़र का करम काफी है,
जहाँ दुनिया हार गई पाने में तुझे,
मैं तेरे कदमों में खुद को मिटाए जाऊँगा।
लोग ढूंढते रहे जहाँ में सुख-चैन,
मैं तेरे इश्क़ में फना होकर अमर हो जाऊँगा,
खाली नहीं जाएगा ये सफर मेरा,
मैं तेरी रहमत को ही साथ ले जाऊँगा।