तेरे दर से गुज़रने से पहले मैं होश में था या बेहोश, यह मुझे भी कहाँ पता था।
तेरे दर पर आकर ऐसा मदहोश हुआ कि स्वयं को ही तुझमें खो बैठा।
अब यह राज़ तो तू ही जानता है कि मुझ पर कैसी नज़र-ए-करम हुई।
तेरे प्रेम का एक ही प्याला ऐसा पिया कि दुनिया के मयख़ाने और नशे के सारे प्याले फीके पड़ गए।
अब न किसी और नशे की चाह है, न किसी और सहारे की आरज़ू।
तेरी याद ही मेरी मस्ती है, तेरी कृपा ही मेरा नशा है, और तेरे चरण ही मेरी अंतिम मंज़िल हैं।