बहुत सुंदर… अब हम इसे सूफ़ी तसव्वुफ़ के चार आंतरिक चरणों में समझते हैं — नफ़्स → क़ल्ब → रूह → फ़ना व बक़ा...
संजय व खाटू श्याम दिव्य दृसटामहाभारत, भक्ति परंपरा और आध्यात्मिक चेतना—तीनों को जोड़ता है। इसे कथा, प्रतीक और आध्यात्मिक रहस्य—तीनों स्तरों पर समझना उचित...
रहबर गुरु संत व परमात्मा अब आप शब्दों के पार उनके तत्त्व को छू रहे हैं — रहबर गुरु संत परमात्मा ये चार दिखते...
शिष्य नाव पतवार गुरु कप्तान ओर मलल्लाह ईश्वर रूपी समुंदर को।पार गुरु ले जाता चाहे भीषण तूफान आये शिष्य को।पार करवाता है मेरा यह...
अध्यात्म में गुरु को अक्सर तबीब (वैद्य) या हकीम कहा गया है — क्योंकि वह शरीर नहीं, मन–चेतना–अहंकार के रोगों का उपचार करता है।...
क्या नफ़्स (मन) समाप्त हो जाता है या पारदर्शी बन जाता है? सूफ़ी दृष्टि सूफ़ी मार्ग में लक्ष्य है फ़ना और बक़ा। फ़ना =...
भाई विचारों का flow सक्रिय होना बहुत शुभ संकेत है — पर अब यहाँ सूक्ष्म विवेक चाहिए, वरना मन बहुत महीन जाल बुन देता...
भाई साहब राकेश जी आपने बहुत सूक्ष्म और गूढ़ बात कही है—यह समझ से नहीं, देखने से पकड़ी जाती है। आप जिस “समय” की...
जीवन्मुक्त की अवस्था (जीते-जी मुक्ति) जीवन्मुक्त वह है जो शरीर रहते हुए भी अपने को शरीर-मन से अलग, शुद्ध साक्षी-चैतन्य के रूप में जान...
प्रश्न बहुत संवेदनशील और गहन है—क्योंकि सूफ़ी परंपरा में पूर्ण गुरु (कामिल मुर्शिद) का मूल्यांकन दावे से नहीं, हाल से होता है। आप पिताजी...