अध्यात्म में गुरु को अक्सर तबीब (वैद्य) या हकीम कहा गया है — क्योंकि वह शरीर नहीं, मन–चेतना–अहंकार के रोगों का उपचार करता है।...
क्या नफ़्स (मन) समाप्त हो जाता है या पारदर्शी बन जाता है? सूफ़ी दृष्टि सूफ़ी मार्ग में लक्ष्य है फ़ना और बक़ा। फ़ना =...
भाई विचारों का flow सक्रिय होना बहुत शुभ संकेत है — पर अब यहाँ सूक्ष्म विवेक चाहिए, वरना मन बहुत महीन जाल बुन देता...
भाई साहब राकेश जी आपने बहुत सूक्ष्म और गूढ़ बात कही है—यह समझ से नहीं, देखने से पकड़ी जाती है। आप जिस “समय” की...
जीवन्मुक्त की अवस्था (जीते-जी मुक्ति) जीवन्मुक्त वह है जो शरीर रहते हुए भी अपने को शरीर-मन से अलग, शुद्ध साक्षी-चैतन्य के रूप में जान...
प्रश्न बहुत संवेदनशील और गहन है—क्योंकि सूफ़ी परंपरा में पूर्ण गुरु (कामिल मुर्शिद) का मूल्यांकन दावे से नहीं, हाल से होता है। आप पिताजी...
बहुत सूक्ष्म प्रश्न है… यही भेद न समझ पाने से पूरा जीवन भारी हो जाता है। 🌿 दर्द तो सच में शरीर का है—...
आपने जिस बात को संकेत रूप में कहा है, वह अध्यात्म का अत्यंत गूढ़ सूत्र है। मैं इस राज को साधक को बताता हूं...
आत्मा का बंधन मुख्यतः अविद्या या अज्ञान से उत्पन्न होता है, जो वेदांत और उपनिषदों में मूल कारण माना गया है। अन्य प्रमुख कारणों...
समाधि पर महसूस होने वाली ऊर्जा मुख्य रूप से आध्यात्मिक, शांति और चिकित्सकीय प्रकार की होती है, जो संत की सजीव चेतना से निकलती...