Author: Guru Ji

हर मनुष्य में छिपा है प्रजापति का सृजनशील रूप

मानव भी संवत्सर प्रजापति” का तात्पर्य वेदों और हिन्दू दर्शन से जुड़ा हुआ है। इसमें निम्नलिखित मुख्य अवधारणाएँ निहित हो सकती हैं: संवत्सर का...

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गुरु जी जो भी साधक सांसारिक समस्या के समाधान के लिए आपसे निवेदन करता है तो क्या यह फ़ना के विपरीत तो नहीं है,...

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बिल्कुल सही लिखा है ये फणा के विपरीत है पर फणा की स्तिथि बहुत कम देखने को।मिलती है जिसमे फना पैदा हो गया वो...

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गुरु की दीक्षा से आत्मबोध तक: शिष्य को पारंगत बनाने की भारतीय परंपरा

गुरु शिष्य को पारंगत (दक्ष) बनाने के लिए कई मार्ग अपनाता है, जो शिष्य की क्षमता, जिज्ञासा और साधना पर निर्भर करते हैं। भारतीय...

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कुर्मा मूर्धा नाड़ी: प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ध्यान और अमृत अनुभूति की रहस्यमयी धारा

कुर्मा मूर्धा नाड़ी” का उल्लेख कई प्राचीन योग और तांत्रिक ग्रंथों में मिलता है। कुछ महत्वपूर्ण ग्रंथ जो इस नाड़ी से जुड़े हैं: इस...

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कुर्मा मूर्धा नाड़ी: ध्यान, शांति और आत्मजागृति की सूक्ष्म राह

कुर्मा मूर्धा नाड़ी” योग और आयुर्वेद से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। इसे “कूर्म नाड़ी” या “कूर्म मुद्रा” भी कहा जाता है। यह एक...

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संगति (अच्छी संगति) और कुसंगति (बुरी संगति) का आध्यात्मिक जीवन में बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह हमारे विचारों, भावनाओं और कर्मों को प्रभावित...

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