गुरु वह है जो आपको अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए। सकन्द पुराण के अनुसार गुरु सात प्रकार के होते हैं। (i) सूचक...
“तू” और “मैं” का “हम” बनना अध्यात्म की गहराई से जुड़ा हुआ विषय है। इसे समझने के लिए तीन पहलुओं को देखना ज़रूरी है—...
आकाश तत्त्व मय शरीर वह सूक्ष्मतम शरीर है, जो पंचतत्त्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) में से आकाश तत्त्व से निर्मित होता है। यह...
भौतिक दुनिया ही सब कुछ लगती है क्योंकि हम इसे अपनी इंद्रियों से अनुभव कर सकते हैं। लेकिन आध्यात्मिक लोक को न देखने के...
पाताल लोक हिंदू धर्म में भौतिक और सूक्ष्म दोनों स्तरों पर वर्णित है। यह धरती के नीचे स्थित सात लोकों में से एक है,...
ब्रह्मांड में आत्माओं के विभिन्न स्तरों की स्थिति को समझने के लिए, हमें हिंदू धर्म, योग, और आध्यात्मिक परंपराओं के दृष्टिकोण को देखना होगा।...
अज्ञानी व्यक्ति संत कैसे बन सकता है? और क्या गुरु-कृपा से पूर्ण संत बना जा सकता है?—ये प्रश्न आत्मज्ञान, साधना और भक्ति के मूल...
केवल्य (मोक्ष) की अवस्था तब आती है जब आत्मा सभी विकारों, मोह, अहंकार, और इच्छाओं से मुक्त हो जाती है। जब तक शरीर की...
विज्ञान और अध्यात्म दो अलग-अलग दृष्टिकोण हैं, जिनके सिद्धांत, उद्देश्य और तरीकों में मौलिक अंतर होता है। विज्ञान का दृष्टिकोण मापन और परीक्षण: विज्ञान...
अष्ट सिद्धियाँ वे विशेष आध्यात्मिक और योगिक शक्तियाँ हैं, जिनकी प्राप्ति से साधक चमत्कारी कार्य करने में सक्षम हो जाता है। ये हैं: