प्रतिदिन ध्यान (मेडिटेशन) में बैठें और “ओम” या “सोऽहं” का मानसिक जाप करें। सांस के साथ मंत्र को जोड़ें: अंदर जाते समय “सो” और...
ओम: यह ब्रह्मांड की आदिशक्ति और अनहद नाद (बिना टकराव के ध्वनि) मानी जाती है। इसे सभी ध्वनियों का स्रोत माना गया है और...
यह सम्पूर्ण स्वतंत्रता की अवस्था है, जहाँ आत्मा न जन्म लेती है, न मृत्यु। वह अनंत शांति, आनंद और ज्ञान (सच्चिदानंद) की अवस्था में...
यम (नैतिक अनुशासन), नियम (स्वअनुशासन), आसन (शारीरिक स्थिरता), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार (इंद्रियों का नियंत्रण), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (ध्यान), और समाधि (पूर्ण तल्लीनता)। समाधि...
केवल्य शब्द का अर्थ है ‘एकांत अवस्था’ या ‘अद्वितीयता’। योग और वेदांत दर्शन में केवल्य को अंतिम मोक्ष या मुक्ति की अवस्था माना गया...
हिंदू धर्म में कहा गया है कि जो लोग अच्छे कर्म, भक्ति और ध्यान में लीन रहते हैं, वे मृत्यु के बाद ईश्वर के...
ईश्वर को विभिन्न धर्मों और दर्शनशास्त्रों में अलग-अलग तरीकों से परिभाषित किया गया है, लेकिन सामान्य रूप से, ईश्वर को सृष्टि का सर्वोच्च, सर्वव्यापी,...
वीतराग का शाब्दिक अर्थ है “राग (मोह) से परे”। इसका मतलब है संसारिक इच्छाओं, सुख-दुख, सफलता-असफलता आदि में समभाव रखना। इसका तात्पर्य वैराग्य (अलगाव)...
गंगा जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु पाए जाते हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं। पानी में प्राकृतिक रूप से ऑक्सीजन की मात्रा...
अज्ञान का नाश करने के लिए: गुरु ‘अंधकार’ (अज्ञान) को ‘प्रकाश’ (ज्ञान) से मिटाते हैं। सही दिशा में प्रेरित करने के लिए: भटकाव और...