अध्यात्मिकता में गुरु-शिष्य परंपरा बहुत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक बंधन है। गुरु केवल शिष्य को सही ज्ञान व मार्ग दर्शन प्रदान करता है, बल्कि उसे सही...
ऋषियों में पूजा धतं करते सहती कैसे आई जबकि ईश्वर का कोई भौतिक अस्तित्व नही वह शुसमध ऊर्जा रूप में अनाहद है जो धक...
मेरे मन की सोच जब ईश्वर अजन्मा अविनाशी शरीर रहित एक उच्च कोटि का परमतत्व ऊर्जा है और 5 तत्वों से परे है फिर...
वेदों का सारांश वेद सनातन धर्म के सबसे प्राचीन और मूलभूत शास्त्र हैं। इन्हें ईश्वर द्वारा ऋषियों को दिव्य ज्ञान के रूप में प्रदान...
एक आध्यात्मिक शिष्य के लिए अपने गुरु, गुरुपरिवार और स्वयं के परिवार के प्रति कर्तव्य और कर्म अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ये कर्तव्य न...
जब स्थूल शरीर और आत्मा अलग अलग है फिर भी आत्मा को कष्ट सहने होते है जब तक स्थूल शरीर है आत्मा को ज़ात...
वेदों में ध्यान, समाधि और एकाग्रता का उल्लेख आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की प्राप्ति के साधन के रूप में किया गया है। इनका उद्देश्य मन...
खोजत खोजत जीवन बीता खोजत-खोजत जीवन बीता,बड़े भाग्य से सद्गुरु पाना ।घर परिवार जगत सब बिसरे,सदगुरु मुझको भूल न जाना।। गुरु चिंतन में ध्यान...
सच्चे गुरु सांसारिक मोह-माया से परे होते हैं। उन्हें प्रभावित करने का एकमात्र तरीका प्रेम, श्रद्धा, भक्ति, समर्पण और सेवा ही है। जब शिष्य...
भंडारे या सत्संग का आयोजन किसी संत की पुण्यतिथि या जयंती पर एक बहुत ही पुण्य कार्य माना जाता है। इसे करने के लिए...