Author: Guru Ji

धर्म

किसी भी धर्म मे मैं का प्रयोग कहि न कहि अहम को बताता है इसलिए व्यक्ति कॉम क्रोध लोभ मोह अहंकार इर्ष्या द्वेष राग...

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इंसान का कल्ब़

इंसान का कल्ब़ एक लाख अस्सी हज़ार जालों से जकड़ा होता है, जिसको कोई कामिल जा़त यानि सतगुरु ही अपनी नज़रे कीमियां से जला...

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आज फिर जब मैं

आज फिर जब मैं मन के शीशे के सामने पहुचा तो हैरान रह गया शीशा बोला आ गए फिर से  आ जाओ मेरा द्वार...

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उलझन 

पिताजी का फरमाना था कक मन की कोई भी उलझन  यदि हमें परेशान करती है तो उसे यदि गुरु के समक्ष  नही कह पा...

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चिंतन

मैंने पढ़ा था लेकिन जाना नहीं था अपने चिंतन अपनी उलझनों को एक बार पूरे मन से व्यक्त कर दिया जाए लिख दिया जाए...

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ज्ञान और गुरु

बिना ज्ञान और गुरु के कुछ भी संभव नही है इसलिये जीवित ओर पूर्ण गुरु मिलना इस जीवन मे जरूरी है जो हमे ज्ञान...

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मोक्ष कि अवस्था

कोई सदाचारी साधक सूक्ष्म ध्यान के द्वारा आंतरिक ब्रहमज्योती और ब्रह्म नाद (शब्द) को प्राप्त करता है, तब उसे आत्मज्ञान होता है साथ ही...

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मोक्ष

मोक्ष का अर्थ है आत्मा द्वारा अपना और परमात्मा का दर्शन करना। आत्मा को मोक्ष भगवान की कृपा से प्राप्त होता है। भगवान की...

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सनातन धर्म

वैदिक या हिंदू धर्म को इसलिए सनातन धर्म कहा जाता है, क्योंकि यही एकमात्र धर्म है जो ईश्वर, आत्मा और मोक्ष को तत्व और...

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