October 4, 2025 शक्तिपात: गुरु की कृपा से जागृत होता आंतरिक प्रकाश गुरु अपने मनचाहे शिष्य को शक्तिपात इसलिए करते हैं ताकि उस शिष्य को दिव्य ऊर्जा, ज्ञान और आत्मज्ञान की जागृति मिल सके। शक्तिपात एक... Read More
October 2, 2025 आत्म-सुधार का पर्व: विकारों के दहन से आत्मज्ञान तक आज दशहरे के दिन बरसात में भीमकाय रावण के पुतले को भीगते देखा और पल भर में उनका रूप विकृत हो गया उनको जलने... Read More
October 2, 2025 भीतर के रावण पर विजय: आत्म-शुद्धि की यात्रा आज दशहरे के दिन बरसात में भीमकाय रावण के पुतले को भीगते देखा और पल भर में उनका रूप विकृत हो गया उनको जलने... Read More
October 1, 2025 जीवित वीतरागी: जीवन रहते ही मुक्ति का अनुभव “जीवित वीतरागी” का अर्थ है – ऐसा साधक या महापुरुष जो जीवन रहते हुए (शरीर सहित) राग-द्वेष से मुक्त हो चुका है।अध्यातम दुनिया मे... Read More
September 30, 2025 धर्म का सार: करुणा, सेवा और मानवता “मानव है और मानवता ही धर्म है” इस विचार का अर्थ है कि मानव होने का सार मानवता में निहित है, और मानवता ही... Read More
September 30, 2025 साक्षी आत्मा और भोग का रहस्य: वेदांत, बौद्ध व संत दृष्टि आदरणीय राठौर अंकल मेरी समझ के अनुसार आत्मा के साथ जो सूक्ष्म शरीर रहता है वही सुख दुख स्वर्ग नरक को अनुभव करता है... Read More