January 20, 2026 गुरु पहाड़ की चोटी है, मार्ग नहीं उठा तो मन मे प्रश्न आया —वह गीता, गुरु-तत्त्व और शिष्य-मार्ग का अत्यंत गूढ़ और सत्य स्वरूप है।यह कथन केवल उपदेश नहीं, अनुभवजन्य सत्य... Read More
January 18, 2026 जो मिट गया, वही पा गया जिस व्यक्ति ने अपने “मैं” (अहंकार) को गुरु/ईश्वर के हवाले कर दिया,जो स्वयं से मुक्त हो गया — अर्थात् कर्ता-भाव और भोक्ता-भाव से छूट... Read More
January 17, 2026 फ़ना और समाधि: इश्क़ और ज्ञान का संगम गीता का अद्वैत और सूफी “फ़ना” — दोनों एक ही सत्य की दो भाषाएँ हैं।एक संस्कृत में बोली गई, दूसरी इश्क़ में।गीता में “एक... Read More
January 16, 2026 इस जंग में जीत का अर्थ है: ख़ुद का हार जाना जीत जाऊंगा ये जंग जो तुम मेरे साथ चलोसच कहता हूं जो नही चले तो लौट न पाएंगे हम तुमये मेरे दिल।की।पुकार है जो... Read More
January 15, 2026 गृहस्थ और गुरु: दो किनारे, एक यात्रा इंसान का ग्रहस्थ जीवन के कर्तेव्य ओर गुरु के प्रति आस्था मंजिल।पाने के लिए त्याग समर्पण और सहनशीलता विनम्रता ओर घर के करतेवयो के... Read More
January 15, 2026 जब जिज्ञासा गुरु से आगे ईश्वर तक पहुँचती है जीवन मे पिता के ज्ञान और सय्यंम संर्पित्ता व उनके गुणों के पाने के लिए उनके व्यवहार और ज्ञान को समझना चाहता था पर... Read More