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ओर दिमाग मे सोचआगआई दर एक है पर पहुचने के लिए चार रास्ते है जिसे क्रोस में दर्शाया गया है वह रे खुदा तू...

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अध्यायातम में एक बात में एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति झलकती है,वहः जाट पात से परे मानवता शालीनता कुलीनता व स्नेह लेकिन इसे थोड़ा संतुलित...

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मेरी ये पंक्तियाँ में समर्पण की बहुत गहरी सुगंध लिए हुए हैं—जैसे कोई भीतर से सचमुच खाली होकर अपने आपको अर्पित कर रहा हो।...

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अनधकार व मो न

अंधकार ओर मोन को, अब इसे तीनों मार्गोंवेदांत, सूफ़ी और योगसे एक साथ समझते हैं। यहाँ गहराई में एक ही सत्य अलग-अलग भाषा में...

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समझ गया म हाशून्य में जाकर जो सकूँन मिला जो स्वम की रूह को चेतन्य में पाया ताभि समझ मे आया गुरु गोविंद दोनो।खड़े...

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कविता: धर्म से ऊपर इंसान परमसत्ता के दर पे, कोई धर्म नहीं होता, वहाँ न कोई हिन्दू, न मुसलमान होता। हमने ही खींची हैं...

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