Pitaji ne बहुत गहरी और सुंदर बात कहि है — इसमें साधक और गुरु के अद्वैत संबंध का सार निहित है। जब ध्यान की...
गुरुदेव कह रहे हैं कि— “मुझे वही देख सकता है जो अंधा हो; वही सुन सकता है जो बहरा हो; और वह ही समझ...
जब कोई साधक समाधि की अवस्था मे शुण्य को प्राप्त कर लेता है ये गुरु के द्वारा दृष्टिपात के बिना व सहयोग के बोना...
सहस्त्रार चक्र में ‘ओम’ का अनुभव एक अत्यंत दिव्य और सूक्ष्म प्रक्रिया है, जो साधक की साधना, ध्यान और आत्मिक शुद्धता के उच्चतम स्तर...
।आत्म-संयम, आध्यात्मिक आराधना और गुरु-कृपा — ये तीनों मिलकर आत्म-जागरण और मोक्ष की दिशा का निर्माण करते हैं।आत्म-संयमआत्म-संयम का अर्थ है—इंद्रियों, मन और इच्छाओं...
“मैं की मटकी क्या फूटी, हृदय मक्खन हो गया” एक आध्यात्मिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें मटकी फूटने का अर्थ है अहंकार (मैं या...
उपनिषदों में यह सिद्धांत अद्वैत (एकत्व) के रूप में स्पष्ट किया गया है।कुछ प्रमुख उद्धरण इस भाव को प्रत्यक्ष रूप में प्रकट करते हैं:छांदोग्य...
वीतरागी में नादब्रह्म का अनुभव साधारण अनुभव से अलग होता है क्योंकि वीतरागी का मन पूर्णतया सांसारिक तृष्णा, वासना, और मोह से मुक्त होता...
उपनिषदों के अनुसार, नाद ब्रह्म (शब्द-ब्रह्म) वह दिव्य ध्वनि है जिससे ब्रह्मांड की उत्पत्ति होती है। यह अनाहत नाद कहलाता है, जो किसी भी...
वेदों में वर्णित नाद ब्रह्म वह दिव्य अनाहत ध्वनि है जो ब्रह्म के स्वरूप और परमात्मा का अनंत, नित्य और शुद्ध स्वरूप है। इसे...