संजय व खाटू श्याम दिव्य दृसटामहाभारत, भक्ति परंपरा और आध्यात्मिक चेतना—तीनों को जोड़ता है। इसे कथा, प्रतीक और आध्यात्मिक रहस्य—तीनों स्तरों पर समझना उचित...
केवट और शबरी —रामायण में घटनाएँ नहीं,चेतना की अवस्थाएँ हैं। केवट और शबरी का प्रेम : आध्यात्मिक अर्थकेवट — “मैं डुबा था, अब नहीं”केवट...
यह विषय डर या दंड का नहीं,चेतना–परिवर्तन और कर्म-बोध का है।गरुड़ पुराण को भयग्रंथ नहीं,मृत्यु–उपदेश की तरह पढ़ें।गरुड़ पुराण : आध्यात्मिक पाठ(मृत्यु के बाद...
चेतना का नाटक (रामायण = आन्तरिक यात्रा)कैकई द्वारा चाहराम — शुद्ध साक्षी चेतनाजो न चाहता है, न टालता है।जो घटता है, उसे पूर्ण स्वीकृति...
यह प्रश्न पुराण-कथा से अधिक आध्यात्मिक प्रतीक (symbolism) का है।विष्णु का शेषनाग की शय्या पर शयन — एक गूढ़ तत्त्व-बोध है।आइए इसे तीन स्तरों...
रामायण के प्रमुख पात्र — राम, दशरथ, सीता, रावण — को “दोष-मुक्त” क्यों माना जाता है, यह समझने के लिए हमें रामायण को सिर्फ...
आपका प्रश्न कृष्ण के चरण में प्रकाशित मनी जो 7 चक्रो के सियोग से पांव में स्तिथ था बहुत सूक्ष्म गहरी राज की बात...
कृष्ण की बाँसुरी केवल एक वाद्य नहीं, बल्कि अद्वैत-रहस्य का जीवित प्रतीक है। उसके स्वर में जो आकर्षण है, वह किसी संगीत-कला का नहीं,...
। यह बिना बजाए बजने वाली ध्वनि है, जो साधना से आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है।संतमत में महत्वसंत परंपरा में अनाहद नाद को...