इल्लत, किल्लत, जिल्लत’ को झेलकर ही शिष्य पूर्णता की ओर बढ़ता है, यह भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का एक अभिन्न अंग रहा है। आइए इसे...
“साधु (संत) की जाति मत पूछो, उसके ज्ञान को देखो।जैसे तलवार का मूल्य होता है, उसकी म्यान (नीचे का खोल) का नहीं।” व्याख्या (अद्वैत...
अध्यात्म का कोई धर्म नहीं होता, यह मानवता से जुड़ा होता है। यह जाति, धर्म, या संप्रदाय की सीमाओं से परे है। साधु की...
नाद ब्रह्म की प्राप्ति के बाद मोक्ष की स्तिथि कब किसी इंसान में अति है जब उसका कब्जा आंतरिक्ष में शून्यता में विलीन होता...
समाधि में ध्यान की अवस्था में विचार शून्य हो जाते हैं, क्योंकि मन पूर्णतः एकाग्र और शांत हो जाता है। इस अवस्था में चेतना...
नादब्रह्म की प्राप्ति और मोक्ष की स्थिति के संदर्भ में आपका प्रश्न गहन और दार्शनिक है। भारतीय दर्शन, विशेष रूप से वेदांत और योग...
समाधि में ध्यान की अवस्था में विचार शून्य हो जाते हैं, क्योंकि मन पूर्णतः एकाग्र और शांत हो जाता है। इस अवस्था में चेतना...
अद्यतमिक दुनिया मे गुरु और शिष्य का साथ जन्म।जन्मों से चला आ रहा है और जब जन शिष्य जन्म लेता है तो गुरु देव...
अजपा जाप एक आध्यात्मिक साधना है जिसमें मंत्र का जाप बिना सचेत प्रयास के, स्वाभाविक रूप से होता है। “जप” का अर्थ है मंत्र...