स्वयं के ऐक्य और ब्रह्मानुभूति के लक्षण इस प्रकार होते हैं:द्वेष, क्रोध, मोह, भय, सुख-दुख की परवाह समाप्त हो जाती है। साधक में समदृष्टि,...
मनुष्य के मस्तिष्क का आकार भौतिक रूप से तो पृथ्वी पर ही सीमित है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से कहा जाता है कि मस्तिष्क का...
“तू जिसे बाहर जमीं पर ढूंढता है वह तो जमीं नहीं, तेरी आत्मा में बसा है” के अर्थ और विचार को समझने के लिए...
अंधकार, फिर उजाले की कणों की ओर बढ़ने की किरण महाप्रकाश यह एक गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक विचार है। इसमें शून्यता (शुण्यता) के उस...
माया के दो प्रमुख आवरण होते हैं जिनका आध्यात्मिक रूप से गहरा अर्थ है:आवरण शक्ति (Avarana Shakti) – यह माया का वह आवरण है...
मुर्शिद का इश्क और ईश्वर का इश्क दोनों आध्यात्मिक प्रेम की गहरी अवस्थाएँ हैं, परंतु इनमें भेद और सूक्ष्म अर्थ होते हैं।मुर्शिद का इश्क...
संत की सोहबत, उनकी नसीहत, मेहर और शिष्य को इजाजत देने की प्रक्रिया से जुड़ी महत्त्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं:पूर्ण संत की सोहबत (संगत)...
पिताजी ने “इश्क़े मिज़ाजी” और “इश्क़े हंकिंकि” के बारे में जो कहा, वह सूफी और अध्यात्मिक परंपरा में बहुत ही महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। इसे...
सद्गुरु को आध्यात्म में एक ऐसे गुरु के रूप में देखा जाता है जो शिष्य को सत्य का अनुभव कराते हैं, उन्हें मोक्ष के...
पिताजी ने “इश्क़े मिज़ाजी” और “इश्क़े हंकिंकि” के बारे में जो कहा, वह सूफी और अध्यात्मिक परंपरा में बहुत ही महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। इसे...