अव्यक्तं व्यक्तमापन्नं मन्यन्ते मामअभुद्दयः ।परं भावमजानन्तो मम सर्वं यथा भवति तत् ॥ २४ ॥भगवान कहते हैं – अज्ञानी मुझे अव्यक्त (निर्गुण) से व्यक्त (सगुण)...
मृत्यु के अंतिम समय में या उसके बाद लंबे समय तक सच्चे रूप से याद रखने वाले मुख्यतः करीबी परिवारजन जैसे पत्नी, बच्चे और...
।एक साधक जब शून्य में पूरी तरह खो जाता है, तो वह केशून्य (पूर्ण शून्यता), मोह भंग (मोह का नाश) और निर्लिप्त (सर्वस्व से...
वेदों में अनहद नाद का वर्णन अप्रत्यक्ष रूप से ‘नाद ब्रह्म’ या आदि शब्द के रूप में मिलता है, जो सृष्टि की मूल ध्वनि...
मेरे पिताजी का अपने शिष्यों को कहा करते थे अध्यायातम में “मर जाओ इससे पहले कि मौत तुम्हें मार दे”। यह अहंकार त्यागकर विनम्र...
सूफी फकीरों मो जिये जी मरने को सुंम बुक उम अध्यायातम में ध्यान में आंखे मुह ओर कान बाद कर अंदुरुनी आवज नाद के...
जीवात्मा के भीतर “अज़म” शब्द गुप्त रूप से विद्यमान है, अर्थात् वहाँ वह स्वरूप में छिपा हुआ है। लेकिन कमील दरवेश (पूर्ण संत या...
भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अवयव (इंद्रियों और शरीर के अंगों) को समझने के लिए आत्मा और शरीर के भेद का उपदेश देते...
गीता के अनुसार कर्तव्य कर्म और मोक्ष का संबंध निष्काम भाव से है, जहां स्वधर्मानुसार किए गए कर्म फल की आसक्ति त्यागकर बंधनमुक्ति का...
शरीर, मन और आत्मा भारतीय दर्शन में अलग-अलग स्तरों पर अस्तित्व रखते हैं, जहाँ आत्मा को शाश्वत और स्वतंत्र माना जाता है जबकि शरीर...