प्रिय भाई सुनील आपने जो दोहा लिखा है उसका मूल अर्थ ये है कि भगवान (प्रभु) की माया बहुत ही शक्तिशाली और बलवान है।...
“अध्यात्म की राह में ‘फिजा’ और ‘फिदा’ के अर्थ बहुत गहरे और सारगर्भित हैं। यहाँ पर ‘फिजा’ का अर्थ होता है वातावरण, मौसम, या...
दार्शनिक दृष्टि से नाद और नाम जप में यह अंतर है कि नाम जप एक क्रिया है जिसमें ईश्वर या गुरु के नाम का...
जब हम किसी भी ईश्वर को याद या उसके ड्सर्शन करते है और नाम जपते है तो हम जाप करते हुवे शांति तो अवश्य...
कर्मयोग को श्रीकृष्ण यो मूल श्लोकभगवद्गीता के अध्याय 2, श्लोक 47 में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥...
इश्क को आध्यात्मिक मार्ग में परिवर्तित करने के लिए सबसे पहले उसे संसारिक मोह से अलग कर परमात्मा या गुरु के प्रति निष्काम भक्ति...
भौतिक दुनिया के कर्म करते हुए अपने को अध्यात्म में लय रखना मतलब बिना स्वार्थ के, पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर्म करना...
चश्म बंदों गोशबन्दों लब बंदोगर न बिनी सिर्रेबर मन बखंदयह पंक्ति दरअसल कबीर या किसी सूफ़ी/भक्ति संत की रचना हो सकती है जिसमें मन...
विभिन्न धर्मों में “मरने से पहले मरना” का अर्थ भले ही थोड़ा अलग हो, लेकिन पिताजी का आध्यात्मिक साधना में इसका मूल अर्थ व...
अध्यात्म में तरीकत की सर्वोच्च अवस्था वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपने अहंकार और निचले स्वभाव से पूरी तरवह ऊपर उठकर ईश्वर के साथ...