Author: Guru Ji

पतंजलि योगसूत्र में कैवल्य का स्वरूप

योगसूत्र (IV अध्याय – कैवल्यपाद) के अनुसार: “पुरुषार्थशून्यानां गुणानां प्रतिप्रसवः कैवल्यम् स्वरूपप्रतिष्ठा वा चितिशक्ति इति।” (योगसूत्र 4.34) अर्थ: जब प्रकृति (गुण) पुरुष के लिए...

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कैवल्य: आत्मस्वरूप में स्थित होने की परम अवस्था

पतंजलि योगसूत्र में कैवल्य का स्वरूप. उपनिषदों और अद्वैत वेदांत में कैवल्य. कैवल्य में भक्ति और प्रेम का स्वाभाविक उदय पतंजलि योगसूत्र में कैवल्ययोगसूत्र...

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शिव की जटा से गंगा : चेतना के अवतरण का योगिक रहस्य

“शिव की जटा से गंगा निकलना” कोई सिर्फ भौतिक घटना नहीं, बल्कि गहरे योगिक और तंत्रिकीय (नाड़ी) रहस्यों का प्रतीक है।गंगा – शुद्ध चेतना...

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शरीर से ब्रह्मांड तक : चेतना की दिव्य यात्रा

आध्यात्मिक तरंग का शरीर के भीतर उत्पन्न होकर ब्रह्मांड तक प्रसारित होना और वापसी का संबंध योग, ध्यान और आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रियाओं से है।...

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आत्म-विकास के पाँच स्तंभ

विवेक (Discernment)​विवेक का अभ्यास करने के लिए, हर स्थिति में खुद से यह सवाल पूछें: “क्या यह मेरे लिए सच में अच्छा है?”​छोटे निर्णयों...

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​अनाहत नाद

​अनाहत नाद एक ऐसी ध्वनि है जो बिना किसी टक्कर या घर्षण के उत्पन्न होती है। यह ब्रह्मांड की शाश्वत, आंतरिक ध्वनि है, जिसे...

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देवयान और पितृयान: आत्मा की दो यात्राएँ

ये शास्ट्रोनमेवलिख हैइसमें वेद-उपनिषद, गीता और स्मृति-ग्रंथों में बताए गए देवयान और पितृयान मार्गों का अच्छा सार है, और साथ ही आपने अपनी व्यक्तिगत...

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