आध्यात्मिक दृष्टि से शुक्ल और कृष्ण पक्ष का महत्वभारतीय आध्यात्म और शास्त्रों में, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष दोनों का ही गहरा आध्यात्मिक महत्व...
ही तू है” का अर्थ है – साधक को हर जगह वही परमात्मा, वही चेतना, वही ईश्वर दिखाई देता है।जब दृष्टि भीतर से निर्मल...
सूर्य और “ॐ”ऋग्वेद, उपनिषद और योगशास्त्र में कहा गया है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक ही मूल ध्वनि “ॐ” (प्रणव) से स्पंदित है सूर्य को...
भक्ति से शुरू होकर समाधि और अंत में नाद ब्रह्म तक पहुँचना। यह मार्ग एक साधक के लिए सबसे महत्वपूर्ण और transformative (रूपांतरकारी) होता...
मनुष्य जन्म।लेने के बाद कर्म के अनुसार जन्म।लेता है और जन्म।के समय पूर्व कर्मो के अनुसार घर चुन जन्म।ले कर बड़ा होता है और...
वेदों में गुरु का महत्व और योगदान आध्यात्मिकता के संदर्भ में अत्यंत उच्च माना गया है। गुरु को आध्यात्मिक मार्ग का पथ-प्रदर्शक, ज्ञान का...
विकार, जिन्हें क्लेश भी कहा जाता है, मानवीय मन की वो अशुद्धियाँ हैं जो हमें दुख और अशांति देती हैं। योग दर्शन और विभिन्न...
अध्यआत्मिक्ता में जब गुरु शिष्य के हृदय पर अपनी ऊर्जा का पूर्ण रूप से शक्तिपात कर उसे शिष्य के रूप से तहेदिल से स्वीकार...
महात्मा राधा मोहन लाल जी, महान गुरु चाचा जी महाराज के द्वितीय पुत्र थे। उनका जन्म अक्टूबर 1900 में हुआ था। उन्हें अपने पिता...
ध्यान योग (Meditation Yoga) में आत्मा की मुक्ति साक्षीभाव व समाधि द्वारा प्राप्त होती है। अंतिम अवस्था: निर्विचार समाधि / सहज समाधिमन के समस्त...