Blogs

भारतीय योग, आयुर्वेद और तत्त्वज्ञान के अनुसार मानव शरीर पाँच महाभूतों (पंचतत्त्व) से बना है। प्रत्येक तत्त्व का अपना कार्य और प्रधान समय माना...

Read More

आपका प्रश्न बहुत गहरा है। विभिन्न परंपराएँ—पतंजलि योग, उपनिषद, अद्वैत वेदांत, नाथ योग, संतमत और भक्ति परंपरा—इन पड़ावों को अलग-अलग शब्दों में बताती हैं,...

Read More

“जिस प्रकार समुद्र की गहराइयों में हजारों प्रकार के जीव रहते हैं, जिन्हें हम अपनी आँखों से नहीं देख पाते, उसी प्रकार मन की...

Read More

समुंदर में उठती लहरों को पार कर, ज़माने की बनाई दीवारों को लाँघ कर, मैं उस सफ़र की ओर निकल पड़ा हूँ, जो सीधे...

Read More

mera ये कथन एक गहरी सोच की ओर संकेत करता है। अनेक संत परंपराओं में कहा गया है कि जब “मैं” (अहंकार), वासनाएँ, और...

Read More

मैं मैं को भूल तू को भूल गया जिसे अलुफ कहते हो गया पर विसवास वो जम गया जो हो न हो मुझे कोई...

Read More