भौतिक दुनिया के कर्म करते हुए अपने को अध्यात्म में लय रखना मतलब बिना स्वार्थ के, पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर्म करना...
चश्म बंदों गोशबन्दों लब बंदोगर न बिनी सिर्रेबर मन बखंदयह पंक्ति दरअसल कबीर या किसी सूफ़ी/भक्ति संत की रचना हो सकती है जिसमें मन...
विभिन्न धर्मों में “मरने से पहले मरना” का अर्थ भले ही थोड़ा अलग हो, लेकिन पिताजी का आध्यात्मिक साधना में इसका मूल अर्थ व...
अध्यात्म में तरीकत की सर्वोच्च अवस्था वह अवस्था है जिसमें व्यक्ति अपने अहंकार और निचले स्वभाव से पूरी तरवह ऊपर उठकर ईश्वर के साथ...
भाई आपने इतने कम शब्दों में नाद का वास्तविक अर्थ लिख दिया और अपने अनुभव से हमे वहः ज्ञान समझाया इसके लिए धन्येवादगुरु या...
नाद ब्रह्म और ओम में मुख्य अंतर इस प्रकार है:अर्थ और स्वरूप:नाद ब्रह्म वह अनाहत (अघोषित) दिव्य ध्वनि है जो ब्रह्माण्ड के सर्वत्र व्याप्त...
स्वयं के ऐक्य और ब्रह्मानुभूति के लक्षण इस प्रकार होते हैं:द्वेष, क्रोध, मोह, भय, सुख-दुख की परवाह समाप्त हो जाती है। साधक में समदृष्टि,...
मनुष्य के मस्तिष्क का आकार भौतिक रूप से तो पृथ्वी पर ही सीमित है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से कहा जाता है कि मस्तिष्क का...
“तू जिसे बाहर जमीं पर ढूंढता है वह तो जमीं नहीं, तेरी आत्मा में बसा है” के अर्थ और विचार को समझने के लिए...
अंधकार, फिर उजाले की कणों की ओर बढ़ने की किरण महाप्रकाश यह एक गहन आध्यात्मिक और दार्शनिक विचार है। इसमें शून्यता (शुण्यता) के उस...