Category: Vachan

गुरु जी जो भी साधक सांसारिक समस्या के समाधान के लिए आपसे निवेदन करता है तो क्या यह फ़ना के विपरीत तो नहीं है,...

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बिल्कुल सही लिखा है ये फणा के विपरीत है पर फणा की स्तिथि बहुत कम देखने को।मिलती है जिसमे फना पैदा हो गया वो...

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संगति (अच्छी संगति) और कुसंगति (बुरी संगति) का आध्यात्मिक जीवन में बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह हमारे विचारों, भावनाओं और कर्मों को प्रभावित...

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समाधि, ध्यान, मनन, चिंतन, एकाग्रता और तल्लीनता ये सभी आध्यात्मिक और मानसिक अभ्यास के महत्वपूर्ण तत्व हैं, जो व्यक्ति को आत्मज्ञान, शांति और सत्य...

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समाधि, ध्यान, मनन, चिंतन, एकाग्रता और तल्लीनता ये सभी आध्यात्मिक और मानसिक अभ्यास के महत्वपूर्ण तत्व हैं, जो व्यक्ति को आत्मज्ञान, शांति और सत्य...

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ध्यान समाधि की पराकाष्ठा तब आती है जब साधक पूरी तरह से आत्म-विस्मृति (self-forgetfulness) की अवस्था में पहुँच जाता है, जहाँ मन, बुद्धि और...

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साधु, संत और मुनि का आचरण पवित्र, संयमित और धर्मपरायण होता है। वे सत्य, अहिंसा, त्याग, और करुणा के मार्ग पर चलते हैं। उनके...

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जब अनाहद नाद (अहुर) हृदय में गूंजता है, तो यह परमात्मा की कृपा का संकेत होता है।

जब अनाहद नाद (अहुर) हृदय में गूंजता है, तो यह परमात्मा की कृपा का संकेत होता है। यह स्थिति तब आती है जब साधक...

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